जगत में जीव कितने हैं ?- Swami Madhavtirth ji
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यह पुस्तक जगत में जीव कितने हैं नाम से लिखी गई है और इसके लेखक स्वामी माधवतीर्थ हैं। लेखक ने अपना पता वेदान्त आश्रम, पो. वलाद, अहमदाबाद के पास बताया है। पुस्तक में दो लेख हैं — प्रस्तावना पर हस्ताक्षर 15 अक्टूबर 1949 के हैं और बाद में निवेदन पर शिवरात्री, 6 मार्च 2008 का है, जिसमें विद्वान आशा व्यक्त की गई है।
पुस्तक का मूल प्रश्न यही है कि जगत में जीव कितने हैं और उनकी गिनती कैसे हो सकती है। लेखक पहले संसार में असंख्य जीव दिखाई देने की बात करते हैं, फिर शास्त्र, गीता, भागवत और ईश उपनिषद् के प्रमाण लेकर बताते हैं कि वस्तु एक ही है। इसके बाद वे प्रत्यक्ष प्राण की छह गलतियाँ गिनाते हैं, जिनमें सूर्य का पृथ्वी से बड़ा दिखना, चन्द्र पर दूसरी तीसरी और चौथी नहीं दिखना तथा सूर्य के प्रकाश में आठ मिनट का विलंब शामिल हैं।
प्रो. आइंस्टाइन के सापेक्षवाद के साथ-साथ बी. रसेल और सर जेम्स जीन्स के वाक्य भी पुस्तक में उद्धृत किए गए हैं। दार्शनिक अध्ययन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक छोटे पैमाने पर वेदान्त-दर्शन को आधुनिक विज्ञान-चर्चा के साथ जोड़ती है, पर इसके निष्कर्ष स्वयं में अनुभव और परंपरा पर आधारित हैं, प्रयोगात्मक परिणाम नहीं। यह पूर्णतः अध्ययन-सामग्री है — किसी उपचार या अनुष्ठान का स्रोत नहीं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- जीवों की संख्या तथा स्वरूप
- आत्मा तथा जगत्
- दार्शनिक विवेचन
- प्रेरक व्याख्या
पुस्तक की मुख्य बातें
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