अमृतसागर नागरी | Amrit Sagar Nagari
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अमृतसागर नागरी नामक पुस्तक का शीर्षक-पृष्ठ 'अमृतसागर' अर्थात अमृतसागरी जीवियों का सागर लिखा है। आवरण पर यह भी दर्जा है कि इसे मूलतः नवल किशोर प्रेस, लखनऊ ने प्रकाशित किया था और बाद में पुनः प्रकाशित एवं डिजिटाइज़्ड किया गया है। प्रकाशक तेजकुमार-बुक डिपो (प्रा०) लिमिटेड, उत्तराधिकारी-नवल किशोर-बुक डिपो, लखनऊ है और प्रबन्ध संचालक श्रीमती सिमता पटवर्धन हैं। मुद्रण अवध पब्लिशिंग हाउस, लखनऊ में 2008 ई० में हुआ है। पृष्ठों पर 'छत्तीस बार-3000' अंकित है और मूल्य 150 रुपये दिया गया है।
शीर्षक-पृष्ठ पर यह भी बताया गया है कि यह ग्रन्थ चरक, सुश्रुत, वागभट, भावप्रकाश, चक्रदत्त और मैक्जरत्नवली जैसे उत्तमोत्तम वैद्यक ग्रन्थों के अवलम्बन से बनाया गया है और इसमें मैक्समूलर-यूपेन विधि का प्रयोग किया गया है। अमृतसागरी जीवियों का सागर अर्थात रसिक-श्रृंगार वर्णाओं का यह संकलन महाभारत की कथाओं को लोकभाषा और नागरी शैली में सँवारकर प्रस्तुत करता है। पुस्तक में अत्यधिक विस्तृत विषय-सूची दी गई है, जिससे कोई भी कथा पृष्ठ-क्रम से सरलता से ढूँढी जा सकती है।
नवल किशोर प्रेस का अमृतसागर हिन्दी साहित्य में महाभारत-कथा का सबसे लोकप्रिय और टिकाऊ रूपांतरण माना जाता है, और आज भी इसका नया पाठ पाठकों तक पहुँच रहा है। यह पुनर्मुद्रित संस्करण उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो शास्त्रीय संस्कृत के बजाय सरल हिन्दी में महाभारत-कथाएँ पढ़ना चाहते हैं। इसमें बड़ी संख्या में चित्र-वर्णन, नाटकीय संवाद और भावपूर्ण कथाएँ मिलती हैं, जो पाठक को कहानी में खींच लेती हैं। यह डिजिटाइज़्ड रूप इंटरनेट-पाठकों के लिए सुविधाजनक और सुलभ संस्करण है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- भक्ति तथा ज्ञान का संकलन
- संत-वाणी तथा प्रसंग
- नाम-जप तथा साधना
- आत्म-कल्याण के उपाय
पुस्तक की मुख्य बातें
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