अर्वाचीन प्राचीन भजन संग्रह | Arvachin Prachin Bhajan Sangrah
इस किताब के बारे में
अर्वाचीन प्राचीन भजन संग्रह एक भक्ति-गीतों का संग्रह है, जिसका संकलन श्रीवत्सलजी महाराज ने किया था। पुस्तक का प्रकाशन श्री कृष्णजी मंदिर, जयपुर से हुआ है। यह सम्वत् २००० के आसपास का संस्करण है। पुस्तक में लगभग ६५४ पृष्ठों का पाठ है, जिसमें भजन-पदावली भी अलग से दी गई है।
संग्रह में प्राचीन और अर्वाचीन दोनों परंपराओं के भजन संग्रित किए गए हैं। प्रत्येक भजन के साथ उसका गीत, राग और परिचय दिया गया है, ताकि पाठक उन्हें गा कर सुन सकें। पद-विच्छेद और अर्थ समझाने वाला भाग अलग से दिया गया है, जिससे पाठक को गीत का भाव पूरा समझ आता है।
भक्ति-साहित्य, संगीत और भजन-गायन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। सभा-आयोजनों और भजन-मंडलियों के लिए यह एक अच्छा संदर्भ है। जिन्हें भारतीय संगीत-परंपरा को समझना है, उनके लिए यह पुस्तक सार्थक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- पुराने तथा नए भजनों का संग्रह
- हिंदी अर्थ सहित
- कीर्तन करने की विधि
- भक्ति तथा नाम-जप का भाव
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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