भजन संग्रह भाग-3 | Bhajan Sangrah Part-3
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भजन संग्रह का तीसरा भाग गीताप्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित है और मुद्रण बालकृष्णलाल जालान ने किया है। पुस्तक में भजन संख्या 1500 दी गई है और इसके अनेक संस्करण क्रमशः संवत् 1958, 1959, 1983, 1984, 1995, 1990 और 1998 में निकले हैं, जिनकी कुल संख्या 29000 बताई गई है।
पुस्तक का आरंभ व्रत-कथा के रूप में किया गया है, जिसमें श्रीकृष्ण को नमस्कार करते हुए कहा गया है कि वे सभी प्रकार के भेदों को नष्ट करने वाले हैं और शारद-ऋतु में उनके गुण गाये जाते हैं। इसके बाद पद-रूप में कृष्ण-भक्ति के भजन दिए गए हैं, जिनमें निर्गुण भक्ति, मीरा की प्यारी भक्ति, लगन वालकों की चाह और भगवान के दर्शन का वर्णन बार-बार आता है। पंक्तियाँ भावपूर्ण और सरल हिन्दी में लिखी गई हैं।
यह किताब उन भक्तों के लिए उपयोगी है जो श्रीकृष्ण और मीरा की भक्ति के भजन पढ़ना और गाना पसंद करते हैं। गीताप्रेस की यह भजन-श्रृंखला लम्बे समय से लगातार छप रही है और कुल भजन-संख्या के हिसाब से बहुत बड़ी है, इसलिए जिस भजन को खोजना हो वह इस संग्रह में पाया जा सकता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- भजनों तथा पदों का संग्रह (भाग 3)
- हिंदी अर्थ सहित
- कीर्तन करने की विधि
- भक्ति तथा नाम-जप का भाव
पुस्तक की मुख्य बातें
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