धर्मायण (अंक 135) – Dharmayan
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धर्मायण नामक पत्रिका के इस अंक के मुखपृष्ठ पर लिखा है कि यह धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय चैतना की पत्रिका है और यह अंक 135 है। इसका प्रकाशन आश्विन 2080 तक, अर्थात सांवत्सर 30 सितम्बर से 28 अक्टूबर 2023 ईस्वी तक, के लिए किया गया है। सम्पादक भवनाथ झा हैं और प्रकाशन महावीर मन्दिर, पटना रेलवे जंक्शन के सामने, पटना-800001 से हुआ है। पृष्ठ पर मूल्य 45 रुपये अंकित है।
इस अंक का विशेष विषय श्राद्ध अर्थात पितृ-पूजा है, जिसके अंतर्गत दस लेख हैं। इनमें सम्पादकीय के अतिरिक्त चार दिनों के प्रस्तादित श्राद्ध की सैद्धान्तिक पृष्ठभूमि, श्राद्ध की वैदिक अधारणा एवं उसका विकास, ददुदिभिः पुत्रस्य पिता जैसे पुत्र के द्वारा पिता को भेंट करने का प्रसंग, भारतीय जनजातियों में दशपत्र की अधारणा, पूर्वजों की पूजा और प्रेततृप्ति दशहरा, वैदिक स्तर पर मृत्यु के पश्चात् श्राद्ध की अधारणा, तीर्थरूप दशतृभूमि तथा प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में दिव्यज्ञान जैसे विषय शामिल हैं।
पितृ-पूजा और श्राद्ध भारतीय संस्कृति का अत्यंत प्राचीन अंश हैं और इनके बारे में शास्त्रीय तथा स्मृति-परंपरा में भिन्न मत मिलते हैं। इसलिए इस पत्रिका में प्रस्तुत विचारों को एक पक्ष के रूप में पढ़ना चाहिए और अपने कुल की परंपरा से मिलान करना चाहिए। धर्म, अनुष्ठान और सांस्कृतिक चिंतन से जुड़े पाठकों के लिए यह शोध-पत्रिका का अंक उपयोगी सामग्री देता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- इस विषय की उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक सामग्री
- सरल हिंदी भाषा में लिखा गया पाठ
- साधक तथा सामान्य पाठक — दोनों के लिए उपयोगी
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