ज्ञानयोग का तत्व | Gyanyog Ka Tatva By Gita Press
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ज्ञानयोग का तत्व गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित एक आध्यात्मिक ग्रंथ है। इसका पूरा शीर्षक ज्ञानयोग का तत्व — सत्सङ्ग और महाव्याख्येका प्रभाव है। पुस्तक में लगभग ३०१ पृष्ठों का पाठ है। प्रथम अध्याय स्वयं सत्सङ्ग और महाव्याख्यान के प्रभाव पर है, जो बताता है कि संतों के साथ बैठने और उनकी शिक्षा सुनने से क्या होता है।
पुस्तक में लगभग २९ विषयों की विषय-सूची दी गई है। वैराग्य, उत्तरार्जन, तत्त्व-चिन्तार, निराकार-साकार, सत्ता और उसके गुण, भगवान क्या हैं, अवतार, देश-काल-तत्व, सत्कर्म, भक्ति का सत्य-विज्ञान, गुणात्मक-अगुणात्मक ध्यान और समुद्र के अग्नि की कथा — ये सभी विषय अलग-अलग प्रकरणों में समाहित हैं। लेखक ने सरल भाषा में गूढ़ बातें खोलकर समझाई हैं।
आध्यात्मिक खोजी, साधक और सत्सङ्ग में जाने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी है। गीता प्रेस के प्रिय पाठकों को इसके सरल प्रकाशन से जोड़ने वाला यह ग्रंथ कई अध्यायों में दर्शन और साधना दोनों पक्षों को छूता है। आत्म-ज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह अच्छी शुरुआत है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- ज्ञानयोग का तत्व तथा स्वरूप
- आत्म-विचार तथा विवेक
- साधना तथा मोक्ष
- सरल भाषा में व्याख्या
पुस्तक की मुख्य बातें
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