जीवनोपयोगी प्रवचन | Jeevan Upayogi Pravchan Swami Ramsukh Das
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जीवनोपयोगी प्रवचन स्वामी रामसुखदास के चुनिंदा प्रवचनों का संकलन है। प्रकाशन गीता प्रेस, गोरखपुर से हुआ है, जहाँ गोविन्द भवन कार्यालय से यह पुस्तक छपती है। संस्करण संवत् २०४२ का है और प्रथम संस्करण में २०,००० प्रतियाँ छपीं। प्रथम संस्करण का मूल्य मात्र ₹३.७५ रखा गया है। पुस्तक में लगभग १६७ पृष्ठों का पाठ है।
प्रवचनों का विषय-क्षेत्र बहुत व्यापक है। गीता के मर्मज्ञ व्याख्याता के रूप में प्रसिद्ध स्वामीजी ने जीवन के अनेक विषयों पर बात की है — संताप, निराशा, निरर्थकता जैसे मानसिक अवस्थाओं से निकलकर सार्थकता और प्राणों में नई चेतना कैसे आ सकती है। भाषा अत्यंत सहज और मर्म-स्पर्शी है, इसलिए विषय कठिन होने पर भी पाठक उसे सरलता से समझ पाता है।
जीवन में दिशा खोजने वाले सामान्य पाठकों, छात्रों तथा धार्मिक साहित्य-प्रेमियों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है। प्रश्न-काल के अनेक लोगों के लिए इन प्रवचनों में उत्तर मिल सकते हैं। सस्ती कीमत और सरल शैली के कारण यह पुस्तक बहुत अधिक पाठकों तक पहुँची है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- जीवन में काम आने वाले प्रवचन
- साधना तथा कर्तव्य की बातें
- मन, चरित्र तथा व्यवहार पर मार्गदर्शन
- सरल भाषा में उपदेश
पुस्तक की मुख्य बातें
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