कल्कि अवतार अथवा कलयुग का अंत — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
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यह पुस्तक कल्कि अवतार नाम से प्रकाशित हुई है और इसमें कलियुग के अन्त का वर्णन है। आवरण-पृष्ठ पर हिन्दी शीर्षक के साथ उर्दू लिपि में भी शीर्षक दिया गया है, और पृष्ठ पर लेखक के रूप में दीपक कालामाघेरी का नाम अंकित है, साथ ही चर्चा मोहम्मद का भी उल्लेख है। पैमाना लगभग 48 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर यह भी दर्ज है कि पुस्तक में कल्कि के अवतरण का वर्णन है, और साथ में कहा गया है कि महावीर का कल्कावतार होना कलियुग के अन्त का प्रारम्भ है। पृष्ठ पर उद्देश्य भी लिखा है कि पाठक महावीर के इन्साफ़ के बारे में जान सके। पृष्ठ पर कल्कि-अवतार के वर्णन के साथ अनेक प्रसंग मिलते हैं, जिनमें अंतिम कलि की घोषणा, धर्म-परिवर्तन तथा कलि-युग आदि शामिल हैं, और साथ में हिन्दी तथा फ़ारसी शब्दों का प्रयोग भी दिखाई देता है। पृष्ठ पर कल्कि-अवतार के वर्णन के साथ अनेक प्रसंग मिलते हैं, जिनमें अंतिम कलि की घोषणा, धर्म-परिवर्तन तथा कलि-युग आदि शामिल हैं, और साथ में हिन्दी तथा फ़ारसी शब्दों का प्रयोग भी दिखाई देता है। शीर्षक-पृष्ठ पर उपशीर्षक भी दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि कलियुग के अन्त का प्रारम्भ महावीर के कल्कावतार होने से हुआ, और उद्देश्य भी लिखा है कि पाठक महावीर के इन्साफ़ के बारे में जान सकें।
यह पुस्तक पौराणिक-अवधि के पाठकों के लिए उपयोगी है, और कल्कि-अवतार तथा कलियुग के प्रसंगों को प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- योगासन तथा उनकी विधि
- प्राणायाम के प्रकार तथा लाभ
- ध्यान तथा साधना के सोपान
- अभ्यास में सावधानियाँ
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