मिथिला में वेद और वेदाङ्ग (डॉ. उदयनाथ झा अशोक) – Mithila Mein Ved Aur Vedang
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आवरण पर पुस्तक का नाम मिथिला में वेद और वेदाङ्ग छपा है और शीर्षक-पन्ने पर उपशीर्षक वेदाङ्गमय एवं वेदाङ्गों में मिथिला का अवदानात्मक इतिहास दिया है। लेखक डॉ. उदयनाथ झा अशोक हैं, जिनके नाम के साथ एम.ए., डी. लिट् और साहित्यरत्न छपा है। प्रकाशक नाग पब्लिशर्स, जवाहर नगर, दिल्ली है। प्राक्कथन इलाहाबाद में वसन्तपञ्चमी २०१३ को पूरा हुआ।
सूचीपत्र के अनुसार पुस्तक पाँच पीठिकाओं में बँटी है। प्रथम पीठिका में मिथिला का संक्षिप्त परिचय और वेद-ब्राह्मण में मिथिला का वैशिष्ट्य है; द्वितीय में वेद, वैदिक साहित्य एवं वेदाङ्ग तथा चारों वेदों की संहिता; तृतीय में ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद् और वेदों का रचनाकाल; चतुर्थ में शिक्षा, कल्पसूत्र, व्याकरण, निरुक्त, छन्दःशास्त्र और ज्योतिष; पञ्चम में उपवेद, अर्थात् आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद और अर्थशास्त्र।
यह पुस्तक वैदिक साहित्य के अध्येता, संस्कृत के शोधार्थी और मिथिला की विद्वत्-परंपरा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए है। इसमें दिखाया गया है कि वेद की किन शाखाओं, वेदाङ्गों और उपवेदों में मैथिल आचार्यों ने क्या जोड़ा, कौन-से ग्रंथ यहाँ रचे गए और किस विषय में यहाँ के पंडितों की ख्याति रही। पुस्तक शोध और अध्ययन का आधार है, इसे मत-प्रतिपादन से अलग रखकर पढ़ना चाहिए।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- मूल ग्रंथ का परिचय तथा महत्व
- श्लोकों का सरल हिंदी अनुवाद व अर्थ
- मुख्य पात्रों तथा प्रसंगों का वर्णन
- जीवन में अपनाने योग्य शिक्षाएँ
पुस्तक की मुख्य बातें
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