नारी रोगांक | Nari Rogank
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शीर्षक-पृष्ठ पर पत्रिका का नाम नारी रोगांक अंकित है और प्रकाशन का नाम वैद्य देवीदयाल वर्मा आयुर्वेदापधानम् दिया गया है। पृष्ठ पर गाँधी मार्ग, नयू दिल्ली का पता भी अंकित है और मूल्य तथा छपाई का विवरण दिया गया है जिसमें डी० प्रिंटर्स का नाम आता है। आरंभ में एक श्लोक दिया गया है जिसमें बताया गया कि नारी रोगों का चिकित्सा स्त्री के हितकरी होता है।
पत्रिका का आरंभ आयुर्वेद के अनुसार स्त्री-शरीर की अवस्थाओं की जाँच से होता है और इसमें बाल्यावस्था से लेकर सोलह वर्ष की अवस्था, अविवाहिता, प्रथम गर्भ और पुनः गर्भ जैसे चरणों का विवेचन किया गया है। पाठ में रोगों की पहचान, कारण और चिकित्सा पर टिप्पणियाँ दी गई हैं और पत्रिका की शैली लोक-व्यावहारिक है। पाठकों के लिए यह पत्रिका आयुर्वेद की जन-परंपरा की समझ के लिए उपयोगी मानी जाती है।
नारी रोगांक एक आयुर्वेदिक पत्रिका है जिसमें स्त्री-स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर लोक-परंपरा के अनुसार लिखा गया है। यह ध्यान रखने योग्य है कि यहाँ दी गई चिकित्सा-विधि और औषधियां शास्त्रीय हैं, आधुनिक चिकित्सा से प्रमाणित नहीं हैं और इनका कोई चिकित्सकीय दावा नहीं है। किसी भी बीमारी के लिए केवल इस पत्रिका के भरोसे पर निर्भर न रहें, बल्कि योग्य चिकित्सक से परामर्श लें और दवा या उपाय उसी की सलाह के अनुसार अपनाएँ।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- स्त्री-रोगों का वर्णन
- कारण तथा लक्षण
- आयुर्वेदिक उपचार
- परहेज़ तथा देखभाल
पुस्तक की मुख्य बातें
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