पद्म पुराण – Padam Puran
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संक्षिप्त पद्मपुराण भागवत पुराण के अठारह पुराणों में से एक है, जिसके रचयिता राजा जयसिंह माने जाते हैं। पद्मपुराण दस खण्डों में विभाजित है और प्रस्तुत पुस्तक इसका प्रथम खण्ड है। इसमें शमी-शेखर टीका भी सहित दी गई है, जिससे मूल श्लोकों का अर्थ सरलता से समझ आ जाता है। प्रकाशन शिवलाल एवं कम्पनी, इलाहाबाद ने किया है और पुस्तक में लगभग १००१ पृष्ठों का पाठ है।
पुराण में सृष्टि, वंश-परम्परा और प्रारंभिक मानव-इतिहास जैसे विषयों का वर्णन मिलता है। प्रारंभ में पद्म, ब्रह्मा तथा विभिन्न ऋषियों-मुनियों की कथाएँ दी गई हैं। टीकाकार ने प्रत्येक श्लोक का भावार्थ अलग से लिखा है, जिससे पौराणिक पाठ पहली बार पढ़ने वाला पाठक भी कठिनाई नहीं में रहता। पृष्ठ-सूची में प्रत्येक अध्याय अलग दर्ज है। शीर्षक-पृष्ठ पर श्रीगणेशाय नमः के साथ संक्षिप्त पद्मपुराण के सप्तखण्डों में प्रथमखण्ड अध्याय १ तथा पुरुषोत्तम पर्व अंकित है। लेखक के रूप में महात्माचार्य वास्तुकल्पसार भाष्यकार और जगन्नाथ सूरि का संयोजन दिया गया है, संपादक श्री गंगालाल जी सूर्यक भट्टक हैं और ग्रन्थकार महादेवप्रसाद शुक्ल बताए गए हैं।
पुराण-अध्येताओं, हिन्दू संस्कृति के विद्यार्थियों तथा भारतीय धर्म-इतिहास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। कठोर संस्कृत के बावजूद टीका की वजह से यह पुस्तक आम पाठकों के लिए भी सुलभ बनी हुई है। धर्म-ग्रंथों के संदर्भ में यह एक आधार-पुस्तक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- पद्म पुराण की कथाएँ
- तीर्थ, व्रत तथा पूजा-विधि
- भक्ति तथा शिव-विष्णु महिमा
- धर्म तथा मोक्ष के उपदेश
पुस्तक की मुख्य बातें
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