पंच महायज्ञ वाणी – Pancha Mahayajna Vani
इस किताब के बारे में
पंच महायज्ञ वाणी एक ऋतु-संस्कार और प्राकृतिक-चिकित्सा संबंधी पुस्तक है। इसके सम्पादक डॉ० कर्णदेव आर्य शास्त्री हैं। प्रस्तुत पुस्तक द्वितीय संस्करण है, जिसकी तारीख १८ अक्टूबर, २०१५ दर्ज है। प्रकाशन नई दिल्ली से हुआ है और सौजन्य श्री अश्विनी बहल एवं श्रीमती अनुराधा बहल को दिया गया है। पुस्तक में लगभग १०८ पृष्ठों का पाठ है।
पुस्तक की भूमिका में लेखक ने प्राकृतिक चिकित्सा के प्रचार पर विचार व्यक्त किए हैं। उनका मानना है कि पिछले समय में दावाइयों के साथ-साथ प्राकृतिक स्नान, मिथक, स्मृति और पारंपरिक संस्कार भी स्वास्थ्य के लिए उतने ही लाभकारी हैं। पंच महायज्ञ से जुड़े संस्कारों को समझाते हुए पाठकों को इनके स्वास्थ्य-लाभ बताए गए हैं।
संस्कार, प्राकृतिक चिकित्सा और आयुर्वेद-सुधार के प्रति रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। आयुर्वेद-अध्येताओं और वैद्यों को प्राकृतिक उपचार-विधियों से परिचित कराने में यह ग्रंथ मदद करता है। (प्राकृतिक उपाय भी योग्य चिकित्सक की सलाह से ही अपनाने चाहिए।)
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- पंच महायज्ञ का महत्व तथा विधि
- यज्ञ तथा हवन के नियम
- प्रवचनों का संकलन
- आध्यात्मिक लाभ
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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