प्रौढ़मनोरमा (बृहत् व लघु शब्दरत्न सहित, भाग 2) – Praudha Manorama with Shabda Ratna
इस किताब के बारे में
यह "प्रौढ़मनोरमा" का वह संस्करण है जिसमें महामहोपाध्याय भट्टोजी दीक्षित की सिद्धान्तकौमुदी-व्याख्या के साथ बृहच्छब्दरत्न तथा लघुशब्दरत्न (नागेश भट्ट) भी संकलित हैं। यह काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (प्राच्यविद्या-ग्रन्थमाला) से प्रकाशित भाग 2 है। संस्कृत व्याकरण एवं शास्त्र-अध्ययन के लिए उच्चकोटि का ग्रंथ।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- आत्मा तथा ब्रह्म का स्वरूप
- जगत् की उत्पत्ति, माया तथा अद्वैत
- साधना, ध्यान तथा आत्मज्ञान के सोपान
- उपनिषद् तथा गीता का सार
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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