राक्षस राज — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
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यह पुस्तक राक्षसराज नाम से प्रकाशित हुई है और शीर्षक पृष्ठ पर लिखा है कि यह बाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड पर आश्रित पौराणिक उपन्यास है। लेखक गोलोकवासी श्री सुदर्शन सिंह चक्र हैं, और उनका परिचय भी दिया गया है जिसमें आविर्भाति 14 नवम्बर 1911 और विरोधाभास 25 सितम्बर 1989 लिखा है। संरक्षक हनुमद् हैं और संस्था श्रीराम अध्यात्मिक प्रन्यास, शुकतीर्थ, जिला मुजफ्फरनगर बताई गई है। प्रकाशन तिथि श्री हनुमद् जयंती, तृतीय संस्करण, संवत् 2075 अर्थात सन् 2019 अंकित है। प्रकाशक डॉ. विवेक गौड़ हैं और पता श्रीराम निकुंज, प्रेमनगर, एटा (उ.प्र.) दिया गया है। मूल्य 120 रुपये अंकित है।
शीर्षक पृष्ठ पर एक विशेष सूचना भी छपी है जिसमें कहा गया है कि इस पुस्तक को या इसके किसी अंश को छापने तथा अनुवादित करने की सबको स्वतन्त्रता है। पहला पन्ना जीवन-चित्र है और उसके बाद अन्तक्रमिका में चौबीस क्रम दिए गए हैं, जिनमें भावी पुरुष, भगवान श्रीकृष्ण, राक्षस, विभ्रमचर, रावण, इन्द्रजीत, सूर्य-ज्ञान और कबीर जैसे विषय क्रम से आते हैं। कई क्रम अध्यायों में टूटे हुए हैं और एक में केवल श्लोक-पंक्ति मिलती है, जो पाठक को समय के बीच की अनुपस्थिति का एहसास कराता है। पुस्तक के अन्त में लेखक ने इस संस्करण की चर्चा से जुड़ी एक टिप्पणी भी लिखी है।
राम-कथा और पौराणिक-उपन्यास पसंद करने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है, क्योंकि रामायण के उत्तरकाण्ड को लेकर लेखक ने एक स्वतंत्र कथा-प्रवाह बनाया है और बीच-बीच में कबीर जैसे संतों का भी उल्लेख मिलता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- योगासन तथा उनकी विधि
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- अभ्यास में सावधानियाँ
पुस्तक की मुख्य बातें
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