सब ते वडा सतगुरु नानक – Sab Te Vada Satgur Nanak
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सब ते वडा सतगुरु नानक गुरु नानक देव जी के जीवन पर आधारित पुस्तक है। आवरण-पृष्ठ पर ऊपर सब ते वडा, सतिगुरु नानक लिखा है और बड़े अक्षरों में भारतीय मनोविज्ञान शीर्षक अंकित है। लेखक के रूप में सुदर्शन सिंह चक्र का नाम और प्रकाशक के रूप में आनंद कानन प्रकाशन दिया गया है। पुस्तक के आरंभ में गुरु नानक देव जी का एक चित्र मुद्रित है, जिसमें वह पहाड़ी भूमि पर सत्संग के साथ चलते हुए दिखाए गए हैं। पुस्तक लगभग सत्रह पृष्ठ की है।
पुस्तक में गुरु नानक देव जी का संक्षिप्त जीवन-वृत्त टाइम-लाइन के रूप में दिया गया है। उनके जन्म १४६९ ई० के रूप में दर्ज है और १५२४ ई० में यूरोप यात्रा के दौरान बहादुरशाह, गुरु गोबिंद सिंह जी और हुमायूँ बहादुर शाह से मिलन का उल्लेख है। १५३० ई० के आसपास शिष्य-अर्ह का विवरण भी दिया गया है, जिसमें गुरु अमीर खुसरो जैसे नाम आते हैं। सिखिल में धर्मोपदेश, सत्कल्य लिखा और सभी लिखा जैसे उपशीर्षकों वाले अध्याय हैं, जिनमें रंगीन चित्र दिए गए हैं। जेठ जी की रेखा, बैठ के साध और सत्संग लिखा जैसे प्रकरण भी हैं।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो गुरु नानक देव जी के जीवन के बारे में जानना चाहते हैं। जीवन-वृत्त संक्षिप्त होने के कारण कुछ ही क्षणों में पूरी जानकारी मिल जाती है। भारतीय मनोविज्ञान के अंतर्गत आने के कारण यह पुस्तक उस शृंखला का हिस्सा है और अन्य खंडों के साथ मिलकर पूरी तस्वीर बनाती है। चित्र-सज्जा सुंदर है, इसलिए पाठक का ध्यान पूरी तरह बना रहता है। नानक-संप्रदाय या सिख धर्म की पृष्ठभूमि को समझने के लिए यह पुस्तक बहुत लाभदायक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- इस विषय की उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक सामग्री
- सरल हिंदी भाषा में लिखा गया पाठ
- साधक तथा सामान्य पाठक — दोनों के लिए उपयोगी
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