वृंदावन की समाधियाँ – Samadhis of Vrindavan
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शीर्षक-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम समाधियों का संग्रह दर्जाया गया है और यह आवरण-शीर्षक वही नाम दोहराता है। पुस्तक पूरी तरह अंग्रेज़ी भाषा में छपी है। प्रथम पृष्ठ पर स्वीकृतियाँ हैं जिनमें लिखा गया है कि यह पुस्तक श्रील प्रभुपाद तथा श्रीकृष्ण और वृन्दावन के देवी-रूपों के आशीर्वाद से ही संभव हो सका। साथ ही श्री रूप गोस्वामी और श्री सनातन गोस्वामी की आचार्य-पीठ की उपलब्धि का श्रेय भी दिया गया है।
पुस्तक के सात अध्याय हैं। पहला अध्याय समाधियों के उद्देश्य, परिभाषा और दर्शन पर है, दूसरा इतिहास पर, तीसरा उनके प्रकार पर जिसमें नाम-संधि और ग्रन्थ-संधि का अन्तर और योग्यता बताई गई है। चौथा अध्याय स्थान पर है, जिसमें वृन्दावन की प्रमुख संधि-स्थलियाँ, राधा-कुंड, संतान गोस्वामी की साधना-स्थली, गोकुलानन्द मन्दिर और नगर के आसपास की चौंसठ संधियाँ व चौसठ महंतों की सूची आती है। पाँचवाँ अध्याय संधि-दर्शन और तीरोभवा-संस्कार पर है और छठा भगवान की पूजा तथा त्योहारों पर। सातवाँ अध्याय सबसे बड़ा है और उसमें लगभग नब्बे वैष्णव आचार्यों के जीवन-परिचय दिए गए हैं। अन्त में परिशिष्ट में द्वादश गोपाल, गौड़ीय वैष्णव कालक्रम और चौसठ महंतों की सूची छपी है।
यह पुस्तक वृन्दावन की भक्ति-परम्परा और भगवान श्रीकृष्ण के अनुजनों के समाधि-स्थलों का परिचय देती है। गौड़ीय वैष्णव इतिहास और साहित्य के अध्ययन के लिए यह पाठ उपयोगी है, और अनेक गोस्वामियों के जीवन-विवरण इसे एक संदर्भ-ग्रन्थ की तरह कामी बनाते हैं। यह ध्यान रखने योग्य है कि यहाँ दी गई जानकारी लेखकों और सम्प्रदाय के अपने अध्ययन एवं स्रोतों पर आधारित है, और इसमें कोई चिकित्सकीय या आध्यात्मिक उपाय नहीं दिया गया है। इसे केवल भक्ति-साहित्य और इतिहास के अध्ययन के रूप में पढ़ा जाना चाहिए।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- इस विषय की उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक सामग्री
- सरल हिंदी भाषा में लिखा गया पाठ
- साधक तथा सामान्य पाठक — दोनों के लिए उपयोगी
- मोबाइल व कंप्यूटर पर पढ़ने योग्य PDF
पुस्तक की मुख्य बातें
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