समरांगण सूत्रधार (वास्तुशास्त्र, भाग 2) - Samarangana Sutradhara
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समरांगण सूत्रधार (वास्तुशास्त्र, भाग 2) – Samarangana Sutradhara

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इस किताब के बारे में

"समरांगण सूत्रधार (वास्तुशास्त्र)" का द्वितीय भाग — मूल रचयिता राजा भोजदेव (धार नरेश)। सम्पादक: प्रो. पुष्पेन्द्र कुमार; प्रकाशक: न्यू भारतीय बुक कॉरपोरेशन, दिल्ली; प्रथम संस्करण 1998 (दो भागों में)। यह वास्तु, शिल्प एवं यन्त्र-विद्या का प्रसिद्ध प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है।

यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।

कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।

📖 पुस्तक के अंदर क्या है —
  • विज्ञान के मूल सिद्धांत सरल भाषा में
  • उदाहरण तथा प्रयोगों की व्याख्या
  • वैज्ञानिक दृष्टि तथा तर्क
  • दैनिक जीवन में विज्ञान का प्रयोग

पुस्तक की मुख्य बातें

📕पूरी पुस्तक, एक ही PDF मेंपूरा ग्रंथ, बिना टूटे
🕉️सरल हिंदी भाषाआसान शब्दों में सामग्री
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