संस्कृतवाङ्मयम् – Sanskrit Vangmayam
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संस्कृतवाङ्मयम् नामक पुस्तक के शीर्षक-पृष्ठ पर यह बताया गया है कि यह प्राचीन संस्कृत साहित्य तथा ग्रन्थ-सूची का संदर्भ-पुस्तक है, और अंग्रेजी शीर्षक-पंक्ति में लिखा है कि इसमें संस्कृत भाषा में प्राचीन साहित्य का ब्रेफ-विवरण तथा अभारतीय लेखकों द्वारा प्राचीन संस्कृत साहित्य पर लिखे गए अभारतीय भाषाओं के ग्रन्थ-सूचियों का भी उल्लेख है। पण्डितवर का नाम डॉ० हरिकृष्णशास्त्रीवातार दिया गया है और उन्हें विद्यारत्न की उपाधि दी गई है।
आवरण पर एक मंडलाकार आकृति बनाई गई है, जिसमें वेद, वेदांग, इतिहास, पुराण, छन्दः, साहित्य-विज्ञान और हस्तलिखित ग्रन्थ जैसे विषय अलग-अलग खंडों में दिखाए गए हैं। पुस्तक में मंडगलम् और शुग्रसूदानम् जैसे प्रकरणों से आरंभ होकर वेद-वेदांग-उपवेद-साहित्य के ग्रन्थों की सूची दी गई है।
यह पुस्तक उन विद्यार्थियों और पंडितों के लिए बहुत उपयोगी है जो संस्कृत साहित्य की किसी विशेष रचना या ग्रन्थ-परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं। ग्रन्थ-नाम, रचयिता और विषय का संदर्भ एक ही स्थान पर मिल जाने से समय बहुत बचता है। भारतीय विश्वविद्यालयों के संस्कृत विभागों और प्रतियोगी-परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह संदर्भ-पुस्तक अत्यंत लाभदायक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- संस्कृत साहित्य का परिचय
- प्रमुख ग्रंथ तथा रचनाकार
- वेद, काव्य तथा शास्त्र
- अध्ययन तथा शोध
पुस्तक की मुख्य बातें
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