शिव स्तोत्रावली – Shiv Stotravali
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शीर्षक-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम शिवस्तोत्रावली अंकित है और उसकी व्याख्या में मूलमात्रम् लिखा है। शीर्षक के साथ यह भी बताया गया है कि यह पाठ आचार्य उत्पलदेव की रचना पर आधारित है और इसका संयोजित संस्करण ईश्वरस्वरूप स्वामी लक्ष्मण जू द्वारा किया गया है। प्रकाशन ईश्वर आश्रम ट्रस्ट, श्रीनगर, कश्मीर का है। पुस्तक-प्राप्ति का पता प्रशस्तांतिक कार्यालय, ईश्वर आश्रम ट्रस्ट, गढ़-उत्तरा, कश्मीर रोड, जम्मू दिया गया है। पृष्ठ पर वर्ष उन्नासी सौ सतानवे और कीमत बीस रुपये अंकित है।
प्राक्कथन में बताया गया है कि आचार्य उत्पलदेव, जो श्री सोमानन्द के शिष्य थे, ने शिवस्तोत्रावली की रचना की थी और आचार्य ने उसके प्रत्येक श्लोक की अपनी सरल भाषा में टिप्पणी करके उपलब्ध कराई है। पादलेख में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शिवस्तोत्रावली नाम से अनेक ग्रन्थ लिखे गए हैं और इस पुस्तक में मूल रूप को ही प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने उत्पलदेव की अन्य रचनाओं जैसे शिवदृष्टि, चिद्युद्धि और शिवसहितापदलाव का भी उल्लेख किया है, तथा बताया है कि यह ग्रन्थ चौदह सम्बत्कृत प्रबन्ध है।
शिवस्तोत्रावली शैव सम्प्रदाय की प्रारंभिक और अत्यंत प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है। पाठ में शिव के विभिन्न रूपों और गुणों की स्तुति के साथ कथाओं और उपदेशों का समन्वय मिलता है। कश्मीर के शैव परंपरा से जुड़ा यह प्रकाशन धार्मिक साधना और साहित्य दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। धार्मिक मान्यताओं से जुड़े अंशों को अपनाने से पहले पाठकों को स्वयं समझ लेना उचित है, और अध्ययन के उद्देश्य से इसे पढ़ना ही सबसे उपयुक्त है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- स्तोत्र/पाठ का मूल पाठ तथा हिंदी अर्थ
- पाठ करने की विधि तथा समय
- पाठ का फल तथा महत्व
- सरल उच्चारण के लिए सहायक निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
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