श्री पंचस्तवी – Shri Panchastavi
इस किताब के बारे में
“श्री पंचस्तवी” — श्रीमद्धर्माचार्य भगवत्पाद प्रणीत; इसमें स्तोत्रित देवता अनन्तकोटि ब्रह्माण्ड नायिका राजराजेश्वरी पराशिवाम्बा श्रीमहात्रिपुरासुन्दरी हैं। यह भगवान गोपीनाथजी महाजयन्ती (1996) के अवसर पर प्रकाशित हुई; सम्बद्ध: भगवान गोपीनाथजी आश्रम (कश्मीर/जम्मू/नई दिल्ली)। यह अत्यंत प्राचीन एवं चमत्कारी स्तोत्र-रत्न है, कश्मीर एवं दक्षिण भारत में विशेष प्रचलित।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- इस विषय की उपयोगी तथा ज्ञानवर्धक सामग्री
- सरल हिंदी भाषा में लिखा गया पाठ
- साधक तथा सामान्य पाठक — दोनों के लिए उपयोगी
- मोबाइल व कंप्यूटर पर पढ़ने योग्य PDF
पुस्तक की मुख्य बातें
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