श्री राम चरित (पूर्व खंड) — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
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श्रीराम चरित भगवान श्रीराम के जीवन-चरित्र पर आधारित पुस्तक है। शीर्षक-पृष्ठ पर शीर्षक श्रीराम चरित बहुत बड़े अक्षरों में अंकित है और उसके नीचे कोष्ठक में (पूर्व खण्ड) लिखा है। लेखक के रूप में सुदर्शन सिंह चक्र का नाम दिया गया है। शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक का नाम अंकित नहीं है। पुस्तक लगभग छह सौ बासठ पृष्ठ की है, जो इसके विस्तृत होने का सूचक है।
पुस्तक राम-कथा को क्रमशः आगे बढ़ाता है। पूर्व खंड में श्रीराम के जन्म, बाल्य-काल, वनवास-प्रसंग, विवाह और राज्याभिषेक जैसी घटनाएँ शामिल हैं। पाठ में मानस और रामचरितमंजरी जैसे ग्रंथों के संदर्भ भी मिलते हैं, जिससे पाठक मूल राम-साहित्य से जुड़ सकता है। छह सौ से अधिक पृष्ठ होने के कारण कहानी किसी भी अध्याय पर टिककर चलती है। सरल हिन्दी में लिखा गया होने के कारण कठिन पौराणिक शैली की परेशानी नहीं होती।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो राम-कथा को केवल सुनने के बजाय विस्तार से पढ़ना चाहते हैं। धार्मिक कथा को इतनी बड़ी पुस्तक में व्यवस्थित रूप से रखा गया है, जो असामान्य बात है। शिव-चरित जैसे अन्य ग्रंथों की तरह यह भी सुदर्शन सिंह चक्र की लेखन-शैली से परिचित पाठकों को रुचेगी। वैष्णव भक्ति में रुचि रखने वालों के लिए यह दीर्घ पुस्तक लंबे समय तक काम आएगी। धार्मिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को समझने के लिए भी यह पुस्तक सहायक है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- योगासन तथा उनकी विधि
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- अभ्यास में सावधानियाँ
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