श्री राम चरित (तृतीय खंड) — श्री सुदर्शन सिंह ‘चक्र’ जी
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श्रीराम चरित राम-चरित्र पर आधारित पुस्तक का तृतीय खण्ड है। आवरण-पृष्ठ पर इसे खण्ड-3 अंकित किया गया है और लेखक का नाम श्रीसुदर्शन सिंह चक्र अंकित है। पुस्तक चित्र-सहित छपा है और यह हिन्दी रामायण के रूप में प्रकाशित हुआ है। पृष्ठ-विवरण के अनुसार यह मथुरा से दो हजार छहहत्तर का संस्करण है, जिसका प्रकाशन श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान से हुआ है। पुस्तक लगभग चार सौ चौदह पृष्ठ की है।
रामचरित के इस खण्ड में रामायण की आगे की कथा व्यवस्थित रूप से दी गई है। चित्रों की संख्या बहुत है, जिससे घटनाएँ पाठक के सामने सजीव रूप से उपस्थित होती हैं। कथानायक और स्थानों का वर्णन लेखक की अपनी शैली में किया गया है, जिसमें भावुकता और मर्म-स्थिति दोनों दिखते हैं। प्रत्येक अध्याय के साथ चित्र दिए गए हैं, इसलिए पढ़ते समय दृश्य स्पष्ट रहता है। कन्हैया संप्रदाय की सेवा-परंपरा से जुड़ी यह पुस्तक राम-भक्ति के रूप में लिखी गई है।
यह पुस्तक उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो रामायण को चित्र-सहित और भाव-पूर्ण रूप में पढ़ना चाहते हैं। कन्हैया संप्रदाय में राम-चरित का बहुत महत्व है और लेखक ने उसी परंपरा में लिखा है। चित्रों की अधिकता से बाल-पाठक भी इसे समझ सकते हैं। तीसरा खण्ड होने के कारण इसे पहले दो खण्डों के साथ ही पढ़ना उचित होगा। कन्हैया संप्रदाय से जुड़े पाठकों के लिए यह एक सार्थक पुस्तक है, और सामान्य राम-भक्ति-प्रेमी भी इसे आनंद से पढ़ सकते हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- योगासन तथा उनकी विधि
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- अभ्यास में सावधानियाँ
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