श्रीमद् भगवद्गीता (टीका सहित) – Shrimad Bhagavad Gita
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श्रीमद्भगवद्गीता-व्याख्यामूलसहित गीता प्रेस का प्रसिद्ध संस्करण है। शीर्षक-पृष्ठ पर स्पष्ट लिखा है कि इसे परम पूज्य श्री गोवर्धनजी स्वामी महाराज के शिष्य श्रीख्यामी स्वामी महाराज ने संकलित करवाया है, और स्वयं श्री गोवर्धनजीजी महाराज विरचित हैं। व्यापारक का नाम डॉ० सुरया सिंह अंकित है, जो बीलासा, बिहार के प० पि० वि० पि० से संबंधित हैं। मूल्य ₹९०/- दर्ज है और मुद्रक चतुर्भुज आरा प्रिंटर्स एण्ड पब्लिशर्स है। पीडीएफ़ में आठ सौ साठ पृष्ठ हैं।
शीर्षक-पृष्ठ पर "॥ धिरो नमः ॥" और "श्रीमत् रामानुजाय नमः" जैसे मंत्र-नमस्कार के बाद पंचायतन के पाँच देवता-चिह्न बने हुए दिखाए गए हैं। पुस्तक में भगवद्गीता का मूल संस्कृत पाठ के साथ गोवर्धनजीजी महाराज की व्याख्या दी गई है, इसलिए श्लोक का शबार्थ और उसके भाव दोनों सरल भाषा में समझ आते हैं। आरंभ में श्रीरामानुजाचार्य तथा अन्य आचार्यों के चित्र, और श्री २००६ तथा श्री २००८ के संदर्भ-चित्र भी दिए गए हैं, जो इस संस्करण की परंपरा और इतिहास को दर्शाते हैं।
भगवद्गीता हिन्दी और संस्कृत दोनों भाषाओं में अत्यधिक पढ़ी जाने वाली धर्म-ग्रंथ है, और इस संस्करण में मूल श्लोक के साथ टीका होने से स्वयं पढ़ने वाला भी बहुत लाभान्वित होता है। अध्याय-क्रम कठिन नहीं रखा गया है, इसलिए कोई भी एक अध्याय चुनकर पढ़ा जा सकता है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- मूल ग्रंथ का परिचय तथा महत्व
- श्लोकों का सरल हिंदी अनुवाद व अर्थ
- मुख्य पात्रों तथा प्रसंगों का वर्णन
- जीवन में अपनाने योग्य शिक्षाएँ
पुस्तक की मुख्य बातें
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