श्री नन्दादेवी राजजात-२००० – Nanda Devi Raj Jat
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यह पुस्तक हिमालय की नन्दा देवी यात्रा पर है। आवरण-पृष्ठ पर हिमालय का दृश्य बना है और उसमें राजजात-मंडल का चिह्न अंकित है। भीतर के शीर्षक-पृष्ठ पर सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक — हिमालय का महाकुम्भ श्री नन्दादेवी राजजात-२००० अंकित है। अंतिम पृष्ठ के मुद्रण-विवरण में स्व० श्री देवराम नौटियाल के लेखों पर आधारित ऐतिहासिक कथा लिखा है, संरक्षक कुंवर बलवंत सिंह, अध्यक्ष, नन्दादेवी राजजात कन्द्रीय समिति और प्रकाशक हिमालय पीठ फाउण्डेशन, गोपेश्वर, घमोली, उत्तराखण्ड बताए गए हैं। पुस्तक छोटी है — चालीस पृष्ठ।
सम्पादक मंडल में शिव कुमार पैन्जूली, डॉ० अनुसूया प्रसाद मैखुरी और डॉ० भगवती प्रसाद पुरोहित का नाम है, और ऐतिहासिक लेखों का सहयोग भुवन नौटियाल, महासचिव, ने दिया है। प्रकाशन सं० २००० जुलाई का बताया गया है। पाठ में नन्दा देवी की नोटी यात्रा, ऊफराई देवी, मौड़ी के राजवंश और राजजात की परंपरा का इतिहास क्रमशः दिया गया है। पुराने दिनों में घर की विवाहित कन्याओं द्वारा की जाने वाली सम्पूर्णा पूजा तथा गर्मियों में मौड़ी देवी के दर्शन जैसे विषय भी आए हैं। पुस्तक का अंतिम पृष्ठ ही पूरा प्रकाशन-विवरण है।
यह पुस्तक उत्तराखण्ड के हिमालयी संस्कृति और तीर्थ-यात्रा की परंपरा को समझने के लिए बहुत उपयोगी है। स्व० श्री देवराम नौटियाल १९३७ से आजीवन श्री नन्दादेवी राजजात समिति के महामंत्री रहे और यात्रा-पर्यटन के माध्यम से सैकड़ों स्थलों तक पहुँचे, इसलिए उनके लेखों में यात्रा का जीवंत वर्णन मिलता है। प्रकाशन-पृष्ठ में विस्तृत जानकारी के लिए www.himalayanyatra.com का उल्लेख भी है। यह सांस्कृतिक और इतिहास-अध्ययन की पुस्तक है; यात्रा पर जाने से पहले स्थानीय व्यवस्था और मौसम के बारे में पहले से जानकारी लेना उचित है। यह पुस्तक केवल पठन और अध्ययन के लिये है — इसमें वर्णित विषयों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, इसलिए इन्हें किसी साधना-विधान का प्रमाण न मानें।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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