वेदार्थ विज्ञानम् – Vedarth Vigyanam
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वेदार्थ-विज्ञानम् नामक पुस्तक के शीर्षक-पृष्ठ पर यह बताया गया है कि यह मूली भारत विरचित निबन्ध की वैज्ञानिक व्याख्या है और यह भाग-1 है। व्याख्याकार का नाम आचार्य अभिनव दिया गया है और वे श्री वैदिक स्वरिस्त पन्था न्यास के प्रमुख तथा वैदिक एवं आधुनिक भौतिकी शोध संस्थान के संचालक बताए गए हैं। सम्पादक का नाम डॉ. मधुसिंका आर्य एवं विशाल आर्य है। प्रकाशक द वेद साइंस पब्लिकेशन्स, बी-114, भोजपुर, भोपाल-462063 है।
प्रथम संस्करण वर्ष 2024 का है और मूल 600 रुपये अंकित है। पृष्ठ पर वेबसाइट व ईमेल पता भी दिया गया है। पुस्तक का आरंभ समर्पणम् से होता है, जिसमें लेखक ने वेद, वेदान्त और विचारकों को समर्पित करते हुए प्रार्थना की है कि वे इस ग्रन्थ को स्वीकार करें। इसके बाद सम्पादकीय में पुस्तक के उद्देश्य और विषय-वस्तु पर विचार किया गया है।
यह पुस्तक परंपरागत वैदिक साहित्य और आधुनिक भौतिक-विज्ञान को एक साथ देखने का प्रयास है, और यह एक आधुनिक स्वयं-प्रकाशित ग्रन्थ है। कुछ प्रतियों में प्राचीन ब्रह्म-ज्ञान को आधुनिक विज्ञान से सीधे जोड़ने का प्रयास किया गया है, जो शास्त्रीय दृष्टि से विवादास्पद है। पाठकों को यह मन में रखना चाहिए कि यहाँ दिया गया समन्वय प्राचीन ग्रन्थों का स्वीकृत सिद्धान्त नहीं है। जिज्ञासु पाठक इसे एक वैकल्पिक दृष्टि के रूप में पढ़ सकते हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- विज्ञान के मूल सिद्धांत सरल भाषा में
- उदाहरण तथा प्रयोगों की व्याख्या
- वैज्ञानिक दृष्टि तथा तर्क
- दैनिक जीवन में विज्ञान का प्रयोग
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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