पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

साइटिका निवृत करने के लिए प्राणायाम

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साइटिका निवृत करने के लिए प्राणायाम

साइटिका निवृत करने के लिए पैरों के तलवे पर सरसों का तेल लगाये और पैरों से ताली बजाएं और सोते -सोते प्राणायाम करें।
साइटिका है तो सुबह सूर्य की किरणों में बैठ के श्वास बाहर निकाल के दायाँ पैर सीधा रखें और बाएं पैर की तरफ खींचे, फिर श्वास ले लेवें । फिर बायाँ पैर आगे रख कर दायें पैर के तरह खींचे ।

-Pujya Sant Shri Asharam Ji Bapu

2017-05-16T11:30:40+00:00 By |Yoga & Pranayam|0 Comments

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