पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

Ayurveda

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गुर्दे के रोग(Kidney diseases)

2017-01-03T06:34:08+00:00 By |Ayurveda, Disease diagnostics|

गुर्दे की कार्यक्षमता घटने से मूत्रोत्पत्ति कम हो जाती है | शरीर पर सूजन आ जाती है | एक-चोथाई [...]

गर्मियों में वरदानस्वरुप हरड रसायन योग

2017-01-01T12:18:46+00:00 By |Ayurveda, Seasonal Care|

लाभ : यह सरल योग ग्रीष्म ऋतू (२० अप्रैल से २० जून' २०१४  तक) में स्वास्थ्य-रक्षा हेतु परम लाभदायी हैं [...]

मुलतानी मिट्टी के फायदे

2016-12-31T17:04:27+00:00 By |Ayurveda|

मुलतानी मिट्टी से स्नान करने पर रोमकूप खुल जाते हैं। मुलतानी मिट्टी से रगड़कर स्नान करने से जो लाभ होते [...]

गाय के घी के अद्भुत लाभ

2016-12-31T16:42:45+00:00 By |Ahar-vihar, Ayurveda|

गाय का घी गुणों में मधुर, शीतल, स्निग्ध, गुरु (पचने में भारी) एवं हृदय के लिए सदा पथ्य, श्रेयस्कर एवं [...]

आयुर्वेदः निर्दोष एवं उत्कृष्ट चिकित्सा-पद्धति

2017-01-05T15:00:05+00:00 By |Ayurveda|

आयुर्वेद एक निर्दोष चिकित्सा पद्धति है। इस चिकित्सा पद्धति से रोगों का पूर्ण उन्मूलन होता है और इसकी कोई भी [...]

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