पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेशधन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।।हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।""ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।"पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

स्वरयंत्र की सूजन के 9 घरेलु उपचार | Laryngitis Symptoms and home remedies

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स्वरयंत्र की सूजन के 9 घरेलु उपचार | Laryngitis Symptoms and home remedies

स्वर यंत्र शोथ (गले में सूजन /Gale ki sujan) परिचय :

स्वरयंत्र यानी आवाज की नली की श्लैष्मिक झिल्ली में जब सूजन आ जाती है तो उसे स्वर यंत्र प्रदाह (गले में जलन) अथवा स्वर यंत्र शोथ (गले में सूजन) कहते हैं। इसमें लसदार (चिपचिपा) श्लेष्मा (बलगम) निकलता है।

लक्षण :

★ स्वर रूक्षता (होरसेन्स आफ वाइस) इस रोग का मुख्य लक्षण है। गले में खराश होना, मन्द ज्वर (हल्का बुखार) होना, सूखी खांसी और पूरे बदन में दर्द होना इसके दूसरे लक्षण होते हैं।
★ जांच करवाने पर स्वरयंत्र (आवाज की नली) की श्लेष्मा परत सूजी हुई और लाल दिखाई देती है। स्वरयंत्र में डिफ्थीरिया होने पर डिफ्थीरिया की झिल्ली दिखाई देती है।
★ खांसी मिटाने वाली औषधि का प्रयोग करना चाहिए और धूम्रपान नहीं करना चाहिए।

★ तेज स्वरयंत्र शोथ (गले की सूजन) के निम्नलिखित कारण होते हैं।

> संक्रमित रोगों के गम्भीर लक्षणों के रूप में जैसे (डिफ्थीरिया, खसरा या इन्फ्लूएन्जा) हो सकता है।
> साधारण जुकाम, तीव्र श्वास प्रणाली शोथ (तेज सांस की नली में सूजन) या तीव्र श्वसनीशोथ के साथ हो सकता है।
> किसी क्षोभक (जहरीली) गैस को सूंघने के कारण हो सकता है।

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विभिन्न औषधियों से उपचार :gale ki sujan ka ilaj

1. सोंठ : सोंठ के साथ कायफर (कायफल) का काढ़ा बनाकर पीने से गले की सूजन और दर्द में आराम आता है।

2. तालीसपत्र : 20 से 40 मिलीलीटर तालीस के पत्तों का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करने से स्वरयंत्र की प्रदाह (गले की जलन) ठीक हो जाती है।gale ki sujan ka ilaj

3. शीतलचीनी : शीतलचीनी या कबाबचीनी मुंह में रखकर चूसते रहने से स्वरयंत्र का प्रदाह (गले की जलन) और स्वर भंग (बैठा हुआ गला) दूर हो जाता है और आवाज पूरी तरह से साफ हो जाती है।

4. कतीरा : 10 से 20 ग्राम कतीरा को सुबह-शाम सेवन करने से गले के बहुत से रोगों में आराम आता है। ध्यान रहे कि कतीरा को सेवन करने से कुछ घंटे पहले पानी में भिगो दें फिर मिश्री मिले हुए शर्बत में मिलाकर सेवन करें।

5. सुहागा : सुहागे की टिकिया को चूसते रहने से स्वरयंत्र शोथ यानी गले में सूजन में आराम आता है।

6. बहेड़ा : 3 से 9 ग्राम बहेड़ा का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से स्वरयंत्र शोथ (गले में सूजन) और गले में जलन दूर हो जाती है। इसके साथ ही इसके सेवन से गले के दूसरे रोग भी ठीक हो जाते हैं।

7. मुलहठी : मुलहठी (जेठीमधु) का टुकड़ा मुंह में रखकर चूसते रहने से स्वरयंत्र शोथ (गले मे सूजन) ठीक हो जाती है।

8. भटकटैया : 20 से 40 मिलीलीटर भटकटैया (रैंगनीकांट) की जड़ की मूल का काढ़ा या ढाई ग्राम से 5 मिलीलीटर पत्तों का रस सुबह-शाम सेवन करने से स्वरयंत्र शोथ (गले में सूजन) में आराम आता है।

9. लता कस्तूरी : लता कस्तूरी के बीजों के चूर्ण का धूम्रपान करने से स्वरयंत्र प्रदाह (गले की सूजन) ठीक हो जाती है।

रोग होने पर क्या करें और क्या न करें :-

1. स्वरयंत्र की सूजन होने पर कम बोलना चाहिए और गले को आराम देना चाहिए। गर्म पानी से गरारे करना लाभकारी होता है।
2. कोई भी चीज खाते समय ध्यान रखें कि उससे गले को कोई नुकसान न हो।
3. अधिक ठंडी या गर्म चीजों को सेवन करना हानिकारक होता है। मिर्च, कोक आदि का सेवन न करें।
4. आग की लपट, धुएं व रसायनों से बचें।
5. नाक व मुंह को मास्क द्वारा ढककर रखें तथा विटामिन-सी व खट्टे पदार्थों का सेवन न करें।

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