लवण भास्कर चूर्ण के 4 बड़े फायदे व सेवन विधि | Lavan Bhaskar Churna ke Fayde

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लवण भास्कर चूर्ण के 4 बड़े फायदे व सेवन विधि | Lavan Bhaskar Churna ke Fayde

लवण भास्कर चूर्ण के लाभ

★ लवण भास्कर चूर्ण एक आयुर्वेदिक चूर्ण या पाउडर है. इसे पाचन सम्बन्धी समस्याओं और कब्ज़ के लिए प्रयोग किया जाता है.
★ लवण भास्कर चूर्ण, सैंधव नमक, काला नमक, सौंचर नमक, समुद्र नमक, धनिया, पिप्पली, पिप्पलीमूल, काला जीरा, तेजपत्र, अम्लवेत, तालिसपत्र, नागकेशर, काली मिर्च, जीरा, सोंठ, अनार दाना, दालचीनी और बड़ी इलाइची से मिलकर बना है. सभी को अच्छे से कूट कर, कपडछन कर रख लिया जाता है.
★ इस चूर्ण के सेवन से अग्निमांद्य/मन्दाग्नि, अजीर्ण, वात-कफज गुल्म, तिल्ली, पेट के रोग, पाइल्स, कब्ज़, चमड़ी की बिमारियों, आमविकार आदि में लाभ होता है.
★ अग्निमांद्य में जठराग्नी ख़राब हो जाने से पाचन बिगड़ जाता है. प्रायः ऐसा अनियमित भोजन करने या पित्त की कमी से होता है. बिगड़े हुए पाचन के कारण भोजन पूरी तरह से पच नहीं पाता और शरीर में बहुत सी पाचन सम्बन्धी समस्याएं हो जाती हैं. पेट में बहुत अधिक गैस और कब्ज़ हो जाता है. खट्टी डकार, भूख न लग्न, उलटी, मितली आदि लक्षण प्रकट हो जाते हैं. पाचन की इन्ही समस्याओं में लवण भास्कर
नीचे इस दवा के घटक, गुण, उपयोग और इस्तेमाल की विधि के बारे में जानकारी दी गयी है.

घर पर कैसे बनाएं लवण भास्कर चूर्ण : lavan bhaskar churna banane ki vidhi

सेंधानमक, विडनमक, पीपल, पिपलामूल, तेजपात, काला जीरा, तालीस पत्र, नागकेशर, अम्लवेत (सब 24-24 ग्राम), जीरा, काली मिर्च, सोंठ (सब 12-12 ग्राम), बड़ी इलाची व दालचीनी 6-6 ग्राम, सौचल नमक 60 ग्राम, समुद्री नमक 96 ग्राम, अनार दाना 48 ग्राम लेकर मिला लें और इसे इतना बारीक पीस लें कि कपड़े से छाना जा सके। इसके बाद नींबू के रस में चूर्ण को मिला दें और छाया में सुखा लें। लवण भास्कर चूर्ण अब तैयार है।

लवण भास्कर चूर्ण के फायदे : lavan bhaskar churna benefits in hindi

1. यह मन्दाग्नि दूर करता है.
2. यह पाचन और अवशोषण सही करता है.
3. यह भूख बढाता है.
4. यह कब्ज़ दूर करता है.

लवण भास्कर चूर्ण के चिकित्सीय उपयोग : lavan bhaskar churna uses

1. अग्निमांद्य (digestive impairment) अजीर्ण या बदहज़मी (dyspepsia)
2. ग्रहणी (mal absorption syndrome)
3. गुल्म (tumor due to Vata Dosha and Kapha Dosha)
4. प्लीहा (splenic disease)
5. उदर (disease of abdomen) कब्ज़ (constipation) शूल (pain)
6. अर्श (piles) भगंदर (fistula-in-ano)
7. शोष (oedema)
8. श्वास (asthma), कास (cough)
9. आमवात (rheumatism) कुष्ठ (disease of skin)
10. हृदयरोग (angina pectoris)

सेवनविधि और मात्रा :lavan bhaskar churna lene ka tarika

1. 1-3 gram सुबह और शाम भोजन के बाद लें.
2. इसे ठन्डे पानी या तक्र/छाछ/दही के साथ लें.

विशेष : हिंगादि हरड़ चूर्ण(Hingadi Harad Churna) गैस, अम्लपित्त, कब्जियत, आफरा, डकार, सिरदर्द, अपचन, मंदाग्नि, अजीर्ण ,बवासीर एवं पेट के अन्य छोटे-मोटे असंख्य रोगों की लाभदायक औषधि है ।
प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है |

2017-12-13T11:01:41+00:00 By |Ayurveda|0 Comments

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