महात्रिफलादि घृत के फायदे लाभ गुण और उपयोग | Maha Triphaladi Ghrit Benefits in Hindi

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महात्रिफलादि घृत के फायदे लाभ गुण और उपयोग | Maha Triphaladi Ghrit Benefits in Hindi

महात्रिफलादि घृत क्या है ? maha triphaladi ghrita in hindi

महात्रिफलादि घृत एक आयुर्वेदिक दवा है। इसके सेवन से नेत्र ज्योति बढ़ती है , यह दिमागी ताकत देनेवाली एवं उदर शुद्धि करने वाली दिव्य औषधि है।

महात्रिफलादि घृत के घटक द्रव्य : maha trifaladi ghrita ingredients

त्रिफला (हरड़, बहेड़ा और आंवला)
•भाँगरा
•बाँसे
•शतावरी
गिलोय
• घी
•पीपल
•मुनक्का
•नीलोफर
मुलेठी
•क्षीरकाकोली
•गुडूची
•कटेरी…इत्यादि

महात्रिफलादि घृत बनाने की विधि : preparation method of maha trifaladi ghrita

त्रिफला क्वाथ ६४ तोला, भाँगरे का रस ६४ तोला, बाँसे का रस ६४ तोला, शतावरी रस ६४ तोला, बकरी का दूध ६४ तोला, आमला रस ६४ तोला, गिलोय का रस ६४ तोला, और घी ६४ तोला- इन सबको एकत्र कर इन औषधियों का कल्क डालें। पीपल, मिश्री, मुनक्का, त्रिफला, नीलोफर, मुलेठी, क्षीरकाकोली, गुडूची, कटेरी – सबको मिलाकर ८ तोला लेकर कल्क बना लें। फिर सब एकत्र मिलाकर पकावें। जब समस्त जलांश भाग जल जाय, तब घृत छान कर रख लें। — भै. र.

वक्तव्य – कल्क अष्टमांश लेने से द्रव पदार्थ द्रवद्वैगुण्य परिभाषानुसार द्विगुण हो गए है।

मात्रा और अनुपान : maha trifaladi ghrita dosage

5 ग्राम से 10 ग्राम, बराबर मिश्री मिलाकर दोनों समय दें।
आइये जाने maha trifaladi ghrita ke fayde in hindi,maha trifaladi ghrita ke labh

महात्रिफलादि घृत के फायदे ,गुण और उपयोग : maha trifaladi ghrita benefits in hindi

1- इसके सेवन से रक्तदुष्टि, रक्तस्त्राव, रतौंधी, तिमिर, आँखों में ज्यादा दर्द होना, आँखों से कम दिखाई पड़ना, शरीर की कमजोरी आदि नेत्ररोग दूर होते हैं। ( और पढ़ेआँखों की रौशनी बढ़ाने वाले सबसे कामयाब घरेलू नुस्खे )

2- त्रिफला की महिमा आयुर्वेदशास्त्र में बहुत वर्णित है तथा इसके उपयोग से लाभ उठाने वाले भी बहुत देखे जाते हैं। यह घृत नेत्रों के लिये बहुत लाभदायक है। केवल त्रिफला के जल से ही प्रात:काल आँख धोने तथा त्रिफला का चूर्ण रात में मिश्री मिला, पानी के साथ लेने से आँख की ज्योति बढ़ जाती है, फिर इस घृत के सेवन से तो बड़ा ही अच्छा लाभ होता है, यह आनुभविक बात है।

3- यदि पित्तवृद्धि के कारण आँखों में तकलीफ हो, जैसे आँखें ज्यादा सुर्ख हो जाना, आँखों की पलकें सूज जाना, प्रकाश में आँख नहीं खुलना, रोहे बढ़ जाना, दर्द होना आदि लक्षण उपस्थित होने पर, इस घृत का मिश्री मिलाकर सेवन करावें और त्रिफला के जल से प्रात:काल आँखों को धोवें तथा रात के समय त्रिफला चूर्ण ३ माशे में बराबर मिश्री मिलाकर दूध या पानी के साथ दें। इस उपचार से बहुत शीघ्र लाभ होता है। वैसे भी जिन्हें नेत्ररोग की शिकायत बराबर बनी रहती हो, वे भी यदि नियमित रूप से कुछ रोज तक इस घृत का सेवन करें, तो आँख तो अच्छी हो ही जायेगी, साथ ही रक्त की भी वृद्धि हो शरीर पुष्ट हो जायेगा। यदि इसके साथ ही मिलाकर तीन-तीन रत्ती सप्तामृत लौह का भी सेवन किया जाये तो और भी श्रेष्ठ लाभ होता है। कई रोगियों पर प्रयोग कर हमने अनुभव किया है। झ्ससे नेत्रों की ज्योति बढ़कर चश्मा लगाने की आवश्यकता नहीं रहती है। ( और पढ़ेचाहे चश्मा कितने भी नंबर का हो वो भी उतरेगा )

उपलब्धता : यह बना-बनाया इसी नाम से बजार में मिलता है |

महात्रिफलादि घृत के नुकसान : maha trifaladi ghrita side effects in hindi

1- इस दवा के साथ कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं। हालांकि चिकित्सा पर्यवेक्षण के तहत इस उत्पाद का उपयोग करना सबसे अच्छा है।
2- मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग और उच्च बीपी वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
3- बहुत अधिक खुराक में, यह दस्त और अपचन का कारण बन सकता है।
4- महात्रिफलादि घृत को डॉक्टर की सलाह के अनुसार सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें।

2018-10-11T09:49:51+00:00 By |Ayurveda|0 Comments