हमारे देश में पाये जानेवाले फलों में नारियल अत्यन्त उपयोगी फल है, जो भूख के साथ-साथ प्यास भी बुझाता है। इसे ‘शुभफल’ तथा ‘श्रीफल’ भी कहते हैं। ‘श्री’ यानी लक्ष्मी का फल।
एक चीनी कहावत के अनुसार नारियल में उतने गुण हैं जितने कि वर्ष में दिन। नारियल का एक पेड़ उगाने का मतलब है अपने परिवारके लिये खाना-पीना, कपड़े, मकान, बर्तन, ईंधन आदि का इंतजाम कर लेना।
भारतीय लोक-व्यवहार में नारियल का विशेष महत्त्व है। यह माङ्गलिक फल माना जाता है। इसकी गिरी, जल, तेल, फूल, जड़ तथा छाल आदि सभी के औषधीय उपयोग हैं।

नारियल गिरी के गुण व फायदे :

(१) आयुर्वेद के अनुसार नारियल की गिरी शीतल, पुष्टिकारक, बलदायक, वात-पित्त और रक्तविकारनाशक होती है। यह देर से हजम होने वाली तथा मूत्राशय शोधक मानी जाती है।
(२) नारियल की सूखी गिरी मधुर, पौष्टिक, स्वादिष्ठ, स्निग्ध, रुचिकारक, बलवीर्य वर्धक तथा मलावरोधक होती है। नारियल में उच्चकोटि का प्रोटीन रहता है।
(३) पकने पर नारियल की गिरी में चिकनाई तथा कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बढ़ जाती है।
(४) नारियल की कच्ची गिरी में अनेक एंजाइम होते हैं जो पाचनक्रिया में मददगार होते हैं। बवासीर, मधुमेह, गैस्ट्रिक और पेप्टिक अल्सर में यह रामबाण औषधि है। चेहरे की झुर्रियाँ मिटाने में यह काफी सहायक है, क्योंकि इसमें चिकनाई एवं स्टार्च होता है। नारियल की गिरी का दूध कुपोषण के शिकार बच्चों के लिये बहुत उपयोगी है।
(५) नारियल मूत्र साफ लाता है, पौरुष में वृद्धि करता है, मासिक धर्म खोलता है, शरीर को मोटा बनाता है तथा मस्तिष्क की दुर्बलता को दूर करता है।
(६) मुँह में छाले हो जाने पर या पान खाने से जीभ कट जानेपर सूखे नारियल की गिरी तथा मिश्री मिलाकर खाने से लाभ होता है।
(७) कच्चे नारियल की २५ ग्राम गिरी महीन पीसकर अरण्डी के तेलके साथ खाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।
(८) प्रातः भूखे पेट नारियल खाने से नकसीर आनी बंद हो जाती है।
(९) नारियल की गिरी बादाम, अखरोट, पोस्ताके दाने मिलाकर सेवन करने से स्मरणशक्ति तथा शरीर की शक्ति बढ़ती है।
(१०) नारियल की गिरी मिस्त्री के साथ खाने से प्रसव-दर्द नहीं होता तथा संतान गौरवर्ण एवं हृष्ट-पुष्ट होती है।
(११) नारियल की गिरी और शक्कर मिलाकर खाने से आँखों के सामान्य रोगों में लाभ होता है।
(१२) पुराने नारियल की गिरी को पीसकर उसमें थोड़ी-सी हल्दी मिलाकर उसे गरम करके चोट मोच पर बाँधने से आराम मिलता है। नारियल की गिरी कब्ज दूर करने में सहायक होती है। यह आँतों में चिकनाहट पैदा कर देती है।

नारियल पानी के औषधीय गुण व लाभ : health benefits of coconut water

कच्चे नारियल को ‘डाभ’ कहते हैं। इसमें काफी मात्रा में पानी रहता है। धीरे-धीरे इस पानीका कुछ भाग मुलायम गिरी में बदल जाता है; फिर पानी सूखने से मुलायम गिरी कठोर बन जाती है, जिसे खोपरा कहते हैं।

(१) नारियल का पानी अमृत के समान उपयोगी होता है। इसे पीने से प्यास बुझने के अलावा शरीर को शक्ति भी प्राप्त होती है। ।
(२) आयुर्वेद के अनुसार नारियल का पानी स्वादिष्ठ, शीतल, रेचक, रक्तशोधक, प्यास और पित्त को शान्त करनेवाला, मूर्छा तथा ज्वरनिवारक होता है। ताजे कच्चे नारियलके पानीमें माँ के दूध के समान गुण रहते हैं। एक नारियलके पानीसे शरीरको दैनिक आवश्यकता के बराबर की मात्रामें विटामिन ‘सी’ मिल जाता है।
(३) एक अमरीकी डॉक्ट रके अनुसार नारियल का पानी ग्लूकोज के पानी की जगह उपयोग में लाया जा सकता है। सात माह के हरे नारियल के पानी के रासायनिक गुण रक्तके प्लैज्मा (Plasma)-के समान होते हैं। उनके अनुसार नारियल के पानी में अधिकतम पोषक तत्त्व होते हैं। इसमें ५ प्रतिशत चीनी (फ़ैक्टोज तथा सुक्रोज)-की मात्रा रहती है।
(४) निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन)-को दूर करनेका यह सस्ता एवं आदर्श द्रव्य है।
(५) डाभका पानी अनिद्रा की अवस्था में लाभकारी है।
(६) नारियल का पानी पीने से हिचकी दूर होती है तथा पेट-दर्दमें लाभ होता है।
(७) पेशाब की जलन में नारियल के पानी में गुड़ तथा हरा धनिया मिलाकर पीने से लाभ होता है।
(८) नारियल का पानी पीने से पेट साफ रहता है। तथा पथरी निकल जाती है।
(९) नारियल का पानी पीकर कच्चा नारियल खाने से पेटके कृमि निकल जाते हैं।
(१०) नारियल का पानी पीने से ज्वर का ताप कम होता है, यह तेज ज्वर को कम करता है।
(११) लू लग जानेपर नारियल के पानीके साथ काला जीरा पीसकर शरीरपर लेप करनेसे शान्ति मिलती है।

नारियलका तेल के स्वास्थ्य लाभ : health benefits of coconut oil

करीब ६५ प्रतिशत नारियल खाने के काम आता है, शेषका तेल निकाला जाता है। एक हजार फलों से करीब २५० किलोग्राम खोपरा तथा करीब १०० लीटर तेल निकलता है। यह तेल २३ से २८ डिग्री सेल्सियस पर पिघलता है तथा इससे कम ताप पर ठोस जमा हुआ रहता है।
(१) तेल करीब २० प्रतिशत खाने में तथा शेष सौन्दर्यवर्धक पदार्थ बनाने के काममें लिया जाता है। इससे साबुन तथा मोमबत्ती भी बनायी जाती है।
(२) नारियल का तेल सुपाच्य होता है। यह खाने तथा तलने के काम आता है। रासायनिक एवं भौतिक दृष्टि से यह तेल मक्खन से बहुत कुछ मिलता-जुलता है। यह वात-पित्तनाशक, दन्तविकारनाशक, कृमिनाशक, केशवर्धक, श्वास, मूत्रघात एवं प्रमेह में बहुत उपयोगी है। यह स्मरणशक्ति बढ़ाता है।
(३) नारियल के तेल में नीबू का रस मिलाकर मालिश करनेसे खुजली मिटती है, बालों का झड़ना तथा सफेद होना बंद हो जाता है।
(४) नारियल के तेल में बादाम पीसकर सिरपर लगाने से सिरदर्द मिटता है।
(५) नारियल का तेल बालों के लिये बहुत उपयोगी तथा गुणकारी है। हलका होने के कारण इससे बाल चिपचिपाते नहीं तथा रूसी आदि की भी शिकायत दूर होती है।
(६) नारियल के तेल की मालिश नाखूनों पर करने से उनकी स्वाभाविक चमक और आयु बढ़ती है।

नारियल के अन्य भागों के फायदे व उपयोग :

(१) नारियल के फूल शीतल, मलावरोधक, स्तम्भक, रक्त-पित्तनाशक, प्रमेहनाशक, रक्तातिसार एवं बहुमूत्रतानिवारक होते हैं।
(२) नारियल के वृक्ष की कोमल जड़ मूत्रविरेचक, शोथ, यकृत्-विकार में उपयोगी है।
(३) जड़ को पानी के साथ पीसकर पेंडू पर गाढ़ा लेप करनेसे पेशाब खुलकर आने लगता है।
(४) नारियल के कोमल पत्ते मधुर होते हैं, अतःखाये भी जाते हैं। इन्हें उबालकर स्वादिष्ठ शाक एवं रायता बनाया जाता है।
(५) नारियल की जटा श्वास सम्बन्धी रोगों में बहुत उपयोगी है। यह वमननाशक तथा रक्तस्राव-निरोधक होती है।
(६) दमा और खाँसी में नारियल की जटा की भस्म में शहद मिलाकर दिन में दो-तीन बार सेवन करने से लाभ होता है। यह हिचकी-रोग में भी हितकारी है।
(७) शरीरके किसी भी भाग से बहते हुए खून पर जटाकी भस्म लगाने से खून बंद हो जाता है।
(८) नारियल की जटा जला-पीसकर उसमें बूरा मिलाकर करीब १० ग्राम फाँकी पानीके साथ लेनेसे खूनी बवासीरमें लाभ होता है।