पायरियां रोग से ग्रस्त होने पर दाँत ढीले होकर हिलने लग जाते हैं। मसूढ़ों से मवाद और रक्त निकलने लगता है। दाँतों पर कड़ी पपड़ियाँ जम जाती हैं। मुंह से दुर्गन्ध आने लगती है। उचित चिकित्सा न करने पर दाँत कमजोर होकर गिर पड़ते हैं।

पायरिया क्यों होता है इसके कारण :

• पायरिया का प्रारम्भ दाँतों की ठीक देखभाल न करने, अनियमित ढंग से जब-तब कुछ-न-कुछ खाते रहने के कारण तथा भोजन के ठीक से न पचने के कारण होता है।
• लीवर की खराबी के कारण रक्त में अम्लता बढ़ जाती है। दूषित अम्लीय रक्त के कारण दाँत पायरिया से प्रभावित हो जाते हैं।
• मांसादि तथा अन्य गरिष्ठ भोज्यपदार्थों का सेवन, पान, गुटका, तम्बाकू आदि पदार्थों का अत्यधिक मात्रा में सेवन ।
• नाक के बजाय मुँह से श्वास लेने का अभ्यास ।
• भोजन को ठीक से चबाकर न खाना, अजीर्ण, कब्ज आदि पायरिया होने के प्रमुख कारण हैं।

पायरिया की दवा व घरेलू उपाय व नुस्खे : payriya ke upay

(१) दाँतों की प्रतिदिन नियमित रूप से अच्छी तरह सफाई करनी चाहिये। भोजन करने के बाद मध्यमा अँगुली से अच्छे मंजन द्वारा दाँतों को साफ करे। नीम या बबूल का दातौन खूब चबाकर उससे ब्रश बनाकर दाँत साफ करने चाहिये।

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(२) सरसों के तेल में नमक मिलाकर अँगुली से दाँतों को इस प्रकार मले कि मसूढ़ों की अच्छी तरह मालिश हो जाय।

(३) शौच या लघुशंका के समय दाँतों को अच्छी तरह भींचकर बैठे। ऐसा करनेसे दाँत सदैव स्वस्थ रहते हैं।

(४) रात को सोते समय १० ग्राम त्रिफला चूर्ण जल के साथ तथा दिन में दो बार अविपत्तिकर चूर्णका सेवन करे।

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(५) जामुन की छाल के काढ़े से दिन में कई बार कुल्ले करे।

(६) नीम का तेल मसूढ़ों पर अँगुली से लगाकर कुछ मिनट रहने दे, फिर पानी से दाँत साफ कर ले।

(७) फिटकरी को भूनकर पीस लें। इसका मंजन पायरिया में लाभप्रद है। फिटकरी के पानीका कुल्ला करे।

(८) भोजन के बाद दाँतों में फँसे रह गये अन्न के कण को नीम आदि की दन्तखोदनी के द्वारा निकाल ले।

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(९) सुबह-शाम पानी में नीबू का रस निचोड़कर पिये।

(१०) पालक, गाजर और गेहूँ के जवारे का रस नित्यप्रति पिये। यह अपने-आपमें स्वतः औषधि का कार्य करता है।

(११) जटामांसी-१० ग्राम, नीला थोथा-१० ग्राम, काली मिर्च-५ ग्राम, लौंग-२ ग्राम, अजवायन-२ ग्राम, अदरक सूखी-५ ग्राम, कपूर-१ ग्राम, सेंधा नमक-५ ग्राम तथा गेरू-१० ग्राम-इन वस्तुओं का समान मात्रा में | महीन चूर्ण बनाकर रख ले। इससे दिन में तीन बार अँगुली से रगड़-रगड़कर देर तक अच्छी तरह से मंजन करे। यह मंजन पायरिया की अनुभूत औषधि है।

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(१२) अजीर्ण और क़ब्ज़ न हो-यह ध्यान रखते हुए हल्का सुपाच्य भोजन ले। रात को सोते समय हरड खाकर गरम दूध पीये। सुबह २ ग्राम सूखे आँवले का चूर्ण पानी के साथ लें। मिर्च-मसाला, चाय कॉफी का प्रयोग न करे।