पूज्य बापू जी का संदेश

ऋषि प्रसाद सेवा करने वाले कर्मयोगियों के नाम पूज्य बापू जी का संदेश धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः। धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता।। हे पार्वती ! जिसके अंदर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका वंश धन्य है, उसके वंश में जन्म लेने वाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है।" "ऋषि प्रसाद एवं ऋषि दर्शन की सेवा गुरुसेवा, समाजसेवा, राष्ट्रसेवा, संस्कृति सेवा, विश्वसेवा, अपनी और अपने कुल की भी सेवा है।" पूज्य बापू जी

यह अपने-आपमें बड़ी भारी सेवा है

जो गुरु की सेवा करता है वह वास्तव में अपनी ही सेवा करता है। ऋषि प्रसाद की सेवा ने भाग्य बदल दिया

सप्तामृत लौह नेत्र ज्योति बढ़ाकर आखों के रोग करे दूर | Saptamrit Lauh – Benefits, Dosage, Ingredients, Side Effects

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सप्तामृत लौह नेत्र ज्योति बढ़ाकर आखों के रोग करे दूर | Saptamrit Lauh – Benefits, Dosage, Ingredients, Side Effects

सप्तामृत लौह आयुर्वेद का लौह कल्प है। लौह कल्प वह दवा है जिनमे मुख्य घटक लौह है। सप्तामृत लौह को बनाने के लिए पांच घटक बराबर मात्रा में मिलाये जाते हैं, ये पांच घटक हैं आमला, हरीतकी, बहेड़ा, मुलेठी और लोह भस्म। यह दवा आँखों की तकलीफें दूर करने के लिए प्रयोग की जाती है। यह सब तरह के आँखों के रोगों की उत्तम दवा है। इसका सेवन आँखों को ताकत देता है और दृष्टि को मजबूत बनाता है।Saptamrit Lauh Detail and Uses in Hindi

सप्तामृत लौह का सेवन दिमाग, आँखों, कान, नाक, गले, आदि इन्द्रियों को ताकत देता है। सही पथ्य का पालन करने पर इसका सेवन एसिडिटी, गैस, मूत्राघात/पेशाब का शरीर में रूक जाना, बुखार, उल्टी, अनीमिया आदि पर अच्छे प्रभाव दिखाता है।

इसका सेवन सभी के लिए हितकर है। यह एक अच्छा रसायन है जो सौम्य है और निरापद है।

कम मात्रा में इसका सेवन यदि सालभर किया जाए तो रस, रक्त, सहित सारी धातुएं सबल हो जाती है और शरीर को कान्ति मिलती है और ओज की वृद्धि होती है।

सप्तामृत लौह को घर पर भी बनाया जा सकता है। इसके लिए आमला (10 gram), हर्रे (10 gram), बहेड़ा (10 gram), मुलठी (10 gram) को बारीक पीस कर कपडे से छान लें। अब इसमें 10 gram लोह भस्म मिला दें। सारे घटकों को अच्छे से मिला कर एक एयर-टाइट डब्बे में रख लें। यही सप्तामृत लोह है।

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Saptamrit Lauh is an Ayurvedic medicine containing herbal and mineral ingredients. It is prepared by mixing Amla, Haritaki, Vibhitaki, Mulethi with loh Bhasma. This medicine is a tonic that improves overall health. It is useful in treatment of diseases of eyes. It improves eye sight and digestion.
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Here is given more about this medicine, such as indication/therapeutic uses, Key Ingredients and dosage in Hindi language.

सप्तामृत लौह के घटक Ingredients of Saptamrit Lauh

★ मुलेठी Madhuka (Yashti) (Rt.) 1 Part
★ हर्रे Haritaki (P.) 1/3 Part
★ बहेड़ा Bibhitaka (P.) 1/3 Part
★ आमला Amalaki (P.) 1/3 Part
★ लोह भस्म Lauha bhasma 1 Part

सप्तामृत लौह के लाभ/फ़ायदे Benefits of Saptamrit Lauh in hindi

★ यह दृष्टि की कमजोरी को दूर करती है।
★ इसका सेवन आँखों की लाली, खुजली, पानी गिरना, अंधेरा छाना, रतौंधी, आँखों में दर्द आदि तकलीफों को दूर करता है।
★ आँखों के अतिरिक्त यह पूरे स्वास्थ्य पर अच्छे प्रभाव डालता है।
★ यह शरीर में लोहे की कमी को दूर करता है और अनीमिया के कारण होने वाली परेशानियों से बचाव करता है।
★ त्रिफला होने के कारण यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है और कब्ज़ नहीं होने देता।
★ इसका महात्रिफला घी से साथ नियमित सेवन करने से लगा हुया चश्मा हट सकता है।
★ यह सभी इन्द्रियों की शक्ति में वृद्धि करता है।
★ यह एक टॉनिक है जो संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

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सप्तामृत लौह के चिकित्सीय उपयोग Uses of Saptamrit Lauh in hindi

यह दवा आँखों की सभी तरह की तकलीफों के लिए लाभदायक है। इसे आँखों में जलन, खुजली, कमजोरी, रतौंधी, मोतियाबिन्द, आदि सभी में प्रयोग किया जाता है।

सप्तामृत लौह का सेवन कब्ज़, कमज़ोर पाचन शक्ति, खून की कमी, कफ की वृद्धि, पेट के कीड़ों, वात-विकार, और शारीरिक कमजोरी को दूर करता है।

★ आँखों की सभी तरह की तकलीफें
★ छर्दि (Emesis),
★ शूल (Colicky Pain)
★ अम्लपित्त (Dyspepsia)
★ ज्वर (Fever)
★ मूत्राघात (Obstruction in urinary tract)
★ तिमिर (early stage of Cataract),
★ कलमा (Tiredness without exertion),
★ अनाह (Distension of abdomen due to obstruction to passage of urine and stools)
★ शोथ (Inflammation)

सेवन विधि और मात्रा Dosage of Saptamrit Lauh in hindi

★ 1-2 गोली (375 mg-750 mg),दिन में दो बार, सुबह और शाम लें।
★ इसे 1 gram घी + 3 gram शहद के साथ लें और फिर गाय का दूध पी लें।
★ इसे भोजन करने के बाद लें।
★ या डॉक्टर द्वारा निर्देशित रूप में लें।

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2017-05-29T10:10:52+00:00 By |भस्म(Bhasma)|0 Comments

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