सारस्वतारिष्ट के फायदे और नुकसान | Saraswatarishta Benefits and Side Effects in Hindi

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सारस्वतारिष्ट के फायदे और नुकसान | Saraswatarishta Benefits and Side Effects in Hindi

सारस्वतारिष्ट क्या है ? saraswatarishta in hindi

सारस्वतारिष्ट एक आयुर्वेदिक दवा है। इसके सेवन से स्मरण शक्ति ,बुद्धि, बल ,और कांति में वृद्धि होती है। यह आसव हृदय को पुष्ट करने वाला चित्त को प्रसन्न रखने वाला एवं पित्त का शमन करता है।

सारस्वतारिष्ट के घटक द्रव्य : saraswatarishta ingredients

• ब्राह्मी
• शतावर
• विदारीकंद
• बड़ी हर्रे
• खस
• अदरख
सौंफ
• गिलोय
गिलोय
• धाय के फूल
• रेणुका
• निशोथ
• छोटी पीपल
लौंग
• बच
• छोटी इलायची
• वायविडंग
दालचीनी
• कूठ… इत्यादि
आइये जाने saraswatarishta bnane ki vidhi के बारे में

सारस्वतारिष्ट बनाने की विधि : Method of manufacturing

ब्राह्मी १ सेर, शतावर, विदारीकंद, बड़ी हर्रे, खस, अदरख और सौंफ-प्रत्येक २०-२० तोला, सबको जौकुट कर २५ सेर ८ तोला जल में पकायें।
जब चौथाई (६ सेर ६ छटाँक २ तोला) जल बाकी रहे, तब कपड़े से छान कर उसमें शहद (अभाव में पुराना गुड़) ४० तोला और चीनी (खाण्ड) १ सेर, धाय के फूल २० तोला, रेणुका, निशोथ, छोटी पीपल, लौंग, बच, कूठ, असगंध, बहेड़ा, गिलोय (गुर्च), छोटी इलायची, वायविडंग, दालचीनी और स्वर्णपत्र-प्रत्येक १-१ तोला, इनका चूर्ण कर, सब सामान को चीनी मिट्टी की पेचदार ढक्कनवाली बरनी (बर्तन में ) भर कर एक मास रहने दें। एक मास बाद तैयार हो जाने पर, कपड़े से छान कर रख लें।
– मै. र.

वक्तव्य – स्वर्णपत्र के स्थान पर सुवर्ण लवण मिलाकर भी बना सकते हैं। सुवर्ण लवण छानने के बाद मिलाना चाहिए। इस योग में जल का परिमाण द्रवद्वैगुण्य परिभाषा के अनुसार लिया गया है। बहुत से वैद्य बिना स्वर्णपत्र डाले भी बनाते हैं। उसमें स्वर्ण के गुणों को छोड़कर शेष सभी गुण रहते है। सर्वसाधारण के लिये यह उपयोगी है।

मात्रा और अनुपान : saraswatarishta dosage

१ तोला से २ तोला तक, सुबह-शाम खाना खाने के बाद समान भाग जल के साथ दें।
आइये जाने saraswatarishta ke fayde in hindi,saraswatarishta ke labh

सारस्वतारिष्ट के फायदे ,गुण और उपयोग : saraswatarishta benefits in hindi

1-  इसके सेवन से आयु, वीर्य,धृति, मेधा (बुद्धि), बल, स्मरणशक्ति और कान्ति की वृद्धि होती है। ( और पढ़ेयादशक्ति बढ़ाने के सबसे शक्तिशाली 12 प्रयोग )

2- यह रसायन – हृद्य अर्थात् हृदय के रोगों को दूर करनेवाला या हृदय को बल प्रदान करने वाला है।

3- सारस्वतारिष्ट बालक, युवा (जवान), वृद्ध, स्त्री, पुरुषों के लिए हितकारी है। यह ओजवर्द्धक है।

4- इसके सेवन से आवाज मधुर हो जाती है ।

5- रजोदोष और शुक्रदोष नष्ट करने के लिए इस आसव का उपयोग किया जाता है। ( और पढ़ेधातु दुर्बलता दूर कर वीर्य बढ़ाने के 32 घरेलू उपाय)

6- अधिक पढ़ने अथवा और भी किसी कारण से स्मरणशक्ति का ह्रास हो गया हो, तो उसे भी ठीक करता है।

7- यह आसव बलवर्धक, ह्दय को पुष्ट करने वाला, चित्त को प्रसन्न करने वाला तथा दिमाग को तर रखनेवाला है। ( और पढ़ेह्रदय को स्वस्थ रखने के उपाय)

8- इसका प्रभाव वातवाहिनी नाड़ियों पर विशेष होता है, यह पित्त शामक भी है।

9- कभी-कभी स्त्रियों को ऐसा मालूम होता है, कि शरीर घूम रहा है। उनकी नजर के सामने सब चीजें घूमती हुई दिखाई देती है। इसमें चक्कर आना, आँख बंद करने से अच्छा मालुम पड़ना, आँख खोलने में परिश्रम और चक्कर का वेग विशेष मालुम होना, घबराहट, चित्त में अशान्ति, तन्द्रा, निद्रा न आना, किसी की बात अच्छी न लगना, कभी-कभी बेहोश भी हो जाना आदि उपद्रव होते हैं । ऐसी अवस्था में सारस्वतारिष्ट के उपयोग से बहुत शीघ्र लाभ होते देखा गया है, क्योंकि उपरोक्त विकार मासिक धर्म की खराबी से उत्पन्न होता है। जिस स्त्री को मासिक धर्म ठीक-ठीक नहीं होता अथवा एकदम नहीं होता या नियत समय पर और उचित मात्रा में नहीं होता, उसे पित्तप्रकोप के कारण उपरोक्त उपद्रव होते हैं, जिससे वातवाहिनी नाड़ियाँ भी उत्तेजित हो जाती हैं। इन सबका सारस्वतारिष्ट तुरन्त शमन कर देता है।

10- छोटे-छोटे बच्चों को लगातार दूध के साथ कुछ दिन तक नियमित रूप से सेवन कराने से उनकी बुद्धि तीव्र हो जाती, स्मरण-शक्ति बढ़ती, बोली अच्छी और स्पष्ट निकलने लगती तथा आँख की रोशनी तेज हो जाती है। अर्थात् गले से उपर जितने अंग हैं, उन अंगों को इससे काफी सहायता मिलती है। इसलिए उन्माद और अपस्मार आदि मानसिक विकारों को दूर करने के लिए सबसे पहले इसी का प्रयोग किया जाता है।

11- जिस स्त्री को यौवनवय आने पर भी रजोधर्म न होता हो, शरीर दुबला हो, अंग प्रत्यंग पुष्ट न हों, शरीर में रक्त की कमी हो, उसे सारस्वतारिष्ट के सेवन से बहुत शीघ्र लाभ होता है। यह गर्भाशय और बीजाशय दोनों को बलवान बनता है ।

सारस्वतारिष्ट के नुकसान : saraswatarishta side effects in hindi

1- गर्भावस्था के दौरान इसके सेवन से बचना चाहिये ।
2- डॉक्टर की सलाह के अनुसार सारस्वतारिष्ट की सटीक खुराक समय की सीमित अवधि के लिए लें

उपलब्धता : यह इसी नाम से बना बनाया बजार में मिलता है |

स्मरण शक्ति बढ़ाने की आयुर्वेदिक दवा : smaran shakti badhane ki ayurvedic dawa

अच्युताय हरिओम फार्मा द्वारा निर्मित स्मरण शक्ति ,बुद्धि और कांति बढ़ानेवाली लाभदायक आयुर्वेदिक औषधियां ।

1) स्मृतिवर्धक चूर्ण
2) शंखपुष्पी सिरप
3)सुवर्णप्राश टेबलेट

प्राप्ति-स्थान : सभी संत श्री आशारामजी आश्रमों( Sant Shri Asaram Bapu Ji Ashram ) व श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सेवाकेंद्र से इसे प्राप्त किया जा सकता है ।

2018-10-10T09:23:54+00:00 By |Ayurveda|0 Comments