स्वस्थ रहने के सरल उपाय :

1-कोई भी व्यक्ति हो, स्त्री-पुरुष, बच्चे, जवान, वृद्ध भोजन करने के तुरन्त बाद उन्हें मूत्र-त्याग करना चाहिए । चिकित्सा शास्त्रियों के अनुसार यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है । कम-से-कम एक हजार बीमारियों से शरीर को मुक्ति मिलती है । ऐसा दावा किया गया है । चिकित्सकों के अनुसार भोजन करने के क्रम में शरीर में प्राकृतिक रूप से कुछ वैज्ञानिक रासायनिक प्रक्रिया प्रारम्भ होती है । कई प्रकार के विजातीय द्रव्य उत्पन्न होते हैं, जो मूत्र संस्थान की ओर इकट्ठे होते जाते हैं। भोजन करने के तुरन्त बाद मूत्र त्याग के लिए जाने पर ये विजातीय द्रव्य शरीर में इकट्ठा नहीं हो पाते और मूत्र के साथ निकल जाते हैं। लेकिन यदि भोजन करने के तुरन्त बाद । मूत्र त्याग के लिए नहीं जाते हैं, तो ये विजातीय द्रव्य शरीर से बाहर नहीं निकलेंगे और शरीर में फैल कर अपना बुरा प्रभाव डालेंगे ।

2-भोजन करने के उपरान्त व्यक्ति को थोड़ा टहलना चाहिए । इससे भोजन का शरीर में पाचन हो जाता है । कम-से-कम रात का भोजन करने के उपरान्त व्यक्ति को एकदम से बिस्तर पर नहीं लेट जाना चाहिए । उसके लिए पचास कदम ही सही, टहलना आवश्यक है।

3-हमेशा बायीं करवट लेटें । अगर आप बायीं ओर करवट लेकर नहीं सोते हैं, तो बिस्तर पर जाने के बाद थोड़े समय के लिए आप ऐसा जरूर करें, फिर सीधी करवट लेट जाएँ। इस तरह बायीं व सीधी करवट लेने के पश्चात् आप स्वाभाविक स्थिति में आराम कर सकते हैं।

4-भोजन करने के तुरन्त बाद पानी न पीएँ । अनेक लोग भोजन करने के तुरन्त बाद दबाकर पानी पीते हैं। ऐसे लोगों के पेट में अन्न का पाचन ठीक से नहीं हो पाता । खाना खाने के लगभग देड से दो घंटा पश्चात् पानी पीएँ ।

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5-एकदम गरम भोजन और ठंडे भोजन से परहेज करें ।

6-एकदम से ठंडे जल को नहीं पीना चाहिए ।

7- एक व्यक्ति को स्वस्थ रहने के लिए कम-से-कम ढाई-तीन लीटर पानी रोजाना पीना चाहिए । जो लोग कम पानी पीते हैं, उनके शरीर की भलीभांति शुद्धि नहीं हो पाती है । पानी पर्याप्त मात्रा में पीने से शरीर के विजातीय पदार्थ मल-मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाते हैं ।

8- स्वस्थ रहने के लिए व्यक्ति को चाहिए कि वह भोजन करने से आधा घंटा पूर्व फल का थोड़ा-सा रस अवश्य पीएँ । थोड़ा-सा जल भी पी लेना ठीक रहता है ।

9-मल-मूत्र त्यागने के पश्चात् दस मिनट तक जल न पीएँ ।

10-चाय पीने से पहले आधा कप पानी अवश्य पीएँ । बर्फ का पानी नहीं पीना चाहिए ।

11-सीधी नासिका से जब श्वांस चल रहा हो, तो भोजन करने से कभी रोग नहीं होता । सीधी नासिका को सूर्य स्वर कहते हैं।

12- उल्टी नासिका से जब श्वांस चल रहा हो, तो जल पीना चाहिए । यह व्यक्ति के स्वास्थ्य को उत्तम बनाता है । उल्टी नासिका को चन्द्र स्वर भी कहते हैं।

13-बिस्तर से सोकर उठते ही एकदम पानी न पीएँ । अन्यथा नजला, जुकाम हो जाएगा। कड़ी धूप से आने के तुरन्त बाद पानी न पीएँ । अन्यथा लीवर पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

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14-कभी भी परेशानियों का रोना लेकर न बैठे । फेंगशुई में परेशानियों का रोना लेकर बैठे रहना अशुभ माना गया है । क्योंकि इससे नकारात्मक ऊर्जा घर में उत्पन्न होती है और व्यक्ति की परेशानियों को और बढ़ा देती है ।

15-मुख्य दरवाजे की ओर पीठ करके कभी न बैठे।

16- घर में अनावश्यक व फालतू सामान न रखें । घर में टूटी घड़ी, खराब कैसेट आदि न रखें ।

17- दादी माँ की सलाह है कि किचन ऐसा होना चाहिए कि खाना बनाने वाली स्त्री दरवाजे के बाहर की हलचल को ताड़ सके अथवा अपनी आँखों से प्रत्यक्षतः देख सके । अगर गृहिणी की कमर के पीछे किचन का दरवाजा है, तो यह उसके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है । स्त्री गर्भाशय के दोष से पीड़ित हो जाएगी । इस दोष से छुटकारा पाने के लिए किचने में एक उत्तल दर्पण लगा देना चाहिए ताकि दरवाजे के बाहर की हलचल या नजारा वह दपर्ण से देख सके ।

18- घर में पैसों की बचत करने के लिए घर के दरवाजे पर तीन टाँगों वाला मेंढक रखें । मेंढक की पीठ द्वार की ओर होनी चाहिए ।

19-दादी माँ की सलाह है कि रुपये का लेने-देन हाथ की पूरी उँगलियों से होना चाहिए । यानी कोई आपको रुपये लौटाता है, तो उस व्यक्ति को चाहिए कि वह नोट को अपने हाथ की सभी उँगलियों से स्पर्श कराए । बजाए इसके केवल दो उँगलियों से नोट पकड़ कर आपको देता है, तो इंकार कर दें लेने से । अन्यथा अशुभ होगा ।

20-आप कोई बना-बनाया नया मकान खरीदना चाहते हैं अथवा कोई भूखंड ही लेना चाहते हैं, तो उस स्थान पर किसी नवजात कन्या को ले जाएँ। अगर घर में घुसते ही कन्या रोने लगे, तो समझिए कि यहाँ पर्याप्त मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा मौजूद है (दादी माँ की सलाह है। कि ऐसा घर कभी न खरीदें) । दूसरी ओर नवजात कन्या घर में घुसते ही मुस्कराती है अथवा अच्छा अनुभव करने के लक्षण दिखाए, तो भूखंड या मकान खरीद लें।

21-रोगी व्यक्ति की दवाइयाँ किचन में भूलकर भी न रखें । अन्यथा दवाइयों का कोई असर नहीं होगा । दवाइयों को केवल बेडरूम में ही रखें ।

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22-घर के मुख्य द्वार या खिड़की के सामने कोई पेड़ नहीं होना चाहिए । पेड़ हो, तो कटवा दें अथवा पर्दै लगाकर रखें । अन्यथा भारी नुकसान हो सकता है ।

23-हालाँकि कैंसर का रोग जानलेवा होता है तथा एलोपैथी में अब तक इसका कोई इलाज नहीं है। दवाएँ खाते रहिए और जीवित रहिए । दादी माँ का कहना है कि कुछ बातों का ध्यान रखकर आप इस जानलेवा रोग का पूर्ण नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं। उनकी सलाह-
✦ यदि आमाशय की सूजन तथा खराब गुर्दे के कारण इस रोग से पीड़ित हैं, तो सर्वप्रथम घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में कोई जेट पम्प या जेनरेटर न रखें । जेट पम्प को पूर्व या उत्तर दिशा में रखवा दें । जेनरेटर को दक्षिण-पूर्व में रख दें ।
✦दोपहर बाद की सूर्य किरणों से अपनी रक्षा करें । अर्थात् रोगी व्यक्ति के लिए दोपहर या दोपहर बाद की किरणें जहर तुल्य हैं । कोशिश करें कि ये किरणें आपकी देह पर न पड़े । अर्थात् इन सूर्य किरणों के सम्पर्क में आप न आएँ ।
✦ घर के बीचोंबीच कोई स्टोर या किचन न रखें । यह स्थान एकदम खुला रहना चाहिए ।
✦अपने बेडरूम के ब्रह्मस्थान में जूते-चप्पल न रखें ।
✦घर में कैक्टस का पौधा न लगाएँ ।
✦घर की छत की दरारों से कोई पौधा बाहर न निकले, इस बात का खास ध्यान रखें ।

23-घर में दर्पण के अपने आप टूट जाने से समझना चाहिए कि मुसीबत टल गई ।

24-त्रिफला को लोहे की कड़ाही में अच्छी तरह से सेंक कर उसे पीस लें । जब चूर्ण बन जाए, तब उसमें रूद्राक्ष को पीसकर उसमें रूद्मक्ष से चौगुनी त्रिफला भस्म शहद में मिला कर लेप बना लें । इस लेप को रोजाना गुदे के मस्सों पर लगाएँ । बवासीर के मस्से धीरे-धीरे ठीक हो जाएँगे ।

25-अगर शरीर के किसी भाग में श्वेत दाग बन गए हों, तो दागों को मिटाने के लिए रूद्राक्ष, जवाखोर, आँवला, राल बराबर मात्रा में लेकर कांजी या राई के घोल में मिलाकर पीस लें। अब इस लेप को दाग पर लगाएँ । इससे दाग कुछ ही हफ्तों में दूर हो जाएगा । खास कर गर्दन के दागों के लिए यह उपाय करना चाहिए ।

26-दादी माँ की सलाह है कि नकसीर के रोगों के निवारण के लिए रूद्राक्ष को घी में तथा चार आँवला आग में सेंक कर कांजी के साथ पीस कर लेप बना लें । जब नकसीर निकले, तब उस लेप को उस पर लगा दें । इससे नकसीर ठीक हो जाती है ।

27-अगर खाँसी के साथ बलगम आता है, तो रूद्राक्ष, मुलहठी, पद्माख, सिरस पुष्प, नील कमल पुष्प, राल बराबर भाग में लेकर लेप बना लें । उसमें गाय का दूध मिलाकर छाती पर लेप करें । इससे बलगम कम हो जाता है ।

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28- रूद्राक्ष व नीम की पत्तियाँ एक साथ उबाल कर घाव धोने तथा रूद्राक्ष को पीसकर लगाने से घाव पूर्णत: ठीक हो जाता है ।

29-बालों को मुलायम, घने और लम्बे बनाए रखने के लिए रूद्राक्ष, मुलहठी, मुनक्का व कम्मारी बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें तथा उसमें गाय का दूध मिला लें । अब तिल का तेल और गाय के घी में मिलाकर लेप बना लें । इस लेप को बालों में लगाएँ । एक घंटे के बाद बालों को धो लें । इससे बाल झड़ते-टूटते नहीं हैं।

30-बरसात के मौसम में अधिकांश लोगों को फोड़े-फेंसियों की शिकायत हो जाती है । दादी माँ की सलाह है कि रूद्राक्ष, रूद्राक्ष से दुगनी मात्रा में मुलहठी, खील व शक्कर (दोनों चौगुनी मात्रा में) लेकर लेप बना लें। अब इस लेप को बरसाती घावों पर लगाएँ। धीरे-धीरे फोड़े-फैंसियाँ ठीक हो जाती हैं।

31- दादी माँ की सलाह है कि अगर आप बीमारियों से बचना चाहते हैं, घर में सुख-शान्ति चाहते हैं, तो अपने शौच घर का दरवाजा हमेशा बन्द रखें, आधी बीमारियाँ स्वत: ठीक हो जाएँगी अथवा किसी बड़ी बीमारी का खतरा नहीं रहेगा।

32- किसी भी नए घर में प्रवेश करने के लिए सबसे पहले मुख्य द्वार की मिट्टी या सतह को चूमें, फिर अपना दाहिनी पाँव आगे बढ़ाएँ । सब मंगल होगा । दुख-दरिद्र से पीछा छूटेगा ।

33-दरवाजे पर मधुर संगीत वाली कॉलबेल लगाने से घर में दुख-दरिद्र का नाश होता है। घर के लोग सुख-शान्ति से रहते हैं ।

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