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लक्ष्मी का वास कहां है ? (प्रेरक कहानी) | Prerak Kahani

📅 11 जनवरी 2019 ✍️ admin ⏱️ 2 मिनट
लक्ष्मी का वास कहां है ? (प्रेरक कहानी) | Prerak Kahani

Last Updated on जुलाई 22, 2019 by admin

एक सेठ रात्रि के समय सो रहे थे कि उनको एक स्वप्न दिखाई दिया। उन्होंने देखा कि लक्ष्मी उन से कह रही है-“सेठ ! अब तुम्हारा पुण्य समाप्त हो गया है, इसलिए मैं थोड़े दिनों में तुम्हारे घर से चली जाऊंगी । तुम्हें मुझ से जो भी मांगना हो वह मांग लो ।’

सेठ बोला- मां ! कल सवेरे अपने कुटुम्ब के लोगों से विचार-विमर्श करके जो मांगना होगा, वह मांग लूंगा । मुझे एक दिन का अवकाश देने की कृपा करो !”
लक्ष्मी बोली-“ठीक है, कल मांग लेना ।”

सवेरा होने पर सेठ ने अपने परिवार वालों को रात के स्वप्न की बात बताई । परिवार वालों में किसी ने हीरा-मोती मांगने के लिए कहा तो किसी ने स्वर्ण-भण्डार मांगने की बात कही । किसी को कुछ और चाहिये था तो किसी को उससे भी कुछ और अधिक चाहिए था ।

सब से अन्त में सेठ की छोटी बहू ने कहा-“पिता जी ! जब लक्ष्मी जी को जाना ही है तो ये सब वस्तुएं मिल जाने पर भी टिकेंगी तो हैं नहीं । इसलिए आप तो यही मागिये कि हमारे कुटुम्ब में प्रेम बना रहे, सद्भावना बनी रहे, सब में परस्पर प्रीति बनी रहे । यदि यह हो गया तो विपत्ति के दिन भी सरलता से कट जायेंगे ।”

सेठ को छोटी बहू की बात पसन्द आ गई । वही हुआ । दूसरी रात्रि में सेठ को फिर से स्वप्न में लक्ष्मी जी दिखाई दीं । सेठ ने प्रार्थना की
देवि ! यदि आप जाना ही चाहती हैं तो प्रसन्नता से जाइये । किन्तु हमें यह वरदान देती जाइये कि हमारे कुटुम्ब में परस्पर प्रेम बना रहे ।”

लक्ष्मी बोली-“सेठ ! तुम ने तो ऐसा वरदान मांग लिया कि मुझे बांध ही लिया । जिस परिवार के सदस्यों में परस्पर प्रीति है, वहां से मैं जा कैसे सकती हूं ?”
छोटी बहू की बुद्धि से सेठ का बिगड़ता परिवार बच गया ।

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