प्रेम योग -स्वामी विवेकानंद | Prem Yog -Swami Vivekananda
इस किताब के बारे में
प्रेम-योग स्वामी विवेकानंद की रचना है, जो श्रीरामकृष्ण-विवेकानन्द-सदीमाला का चतुर्थ पुस्तक है। इसका अंग्रेज़ी शीर्षक Religion of Love अंकित है। अनुवाद कार्य पंडित दाराशनाय तिवारी ने किया है। प्रकाशन श्रीरामकृष्ण आश्रम, नागपुर से हुआ है और पुस्तक में लगभग १८६ पृष्ठों का पाठ है।
पुस्तक में बताया गया है कि ईश्वर के प्रति सबसे उच्च भाव प्रेम ही है। विवेकानंद ने समझाया है कि संस्कार-बंधन, जाति-भेद और धार्मिक कर्मकाण्ड से ऊपर उठकर जो साचा प्रेम है, वही मनुष्य को देवता के पास ले जाता है। उन्होंने भारत के विभिन्न धर्मों और संतों की परंपराओं में प्रेम की केंद्रीय भूमिका दिखाई है। पुस्तक का सार यह है कि जिसे किसी का भी प्रेम न हो, वह ईश्वर का प्रेमी भी नहीं हो सकता।
आध्यात्मिक पाठकों, भक्ति-मार्गी साधकों तथा विवेकानंद के विचारों के अध्येताओं के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी है। साम्प्रदायिक भेदभाव से ऊपर उठकर सभी परंपराओं का सम्मान करने वाला दृष्टिकोण इसे आज भी प्रासंगिक बनाता है। हिन्दी में उपलब्ध प्रेम-योग के अनुवादों में यह एक प्रामाणिक और सुसंपादित प्रति है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- प्रेम योग (भक्तियोग) का स्वरूप
- ईश्वर-प्रेम तथा भक्ति
- भक्त के लक्षण
- साधना के निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
डाउनलोड कैसे करें — बस 3 कदम
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