शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के कारण और इलाज | Shighrapatan Ki Dawa

Last Updated on October 10, 2019 by admin

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के लक्षण :

इस रोग में पहले तो समागम काल ही कम होता है, बाद में मैथुन क्रिया से पूर्व ही वीर्य स्खलित हो जाता है। आगे चलकर रोगी द्वारा किसी स्त्री के मात्र आलिंगनबद्ध करते ही वीर्य च्युत हो जाता है, इस रोग के अत्यधिक बिगड़े रूप में मात्र स्त्री-प्रसंग की कल्पना से ही शुक्र (वीर्य) गिर जाया करता है। यदि यह विकार चलता ही रहे इसका रोगी यथोचित उपचार न कराये तो रोगी अन्त में नंपुसक हो जाता है।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के कारण : shighrapatan ke karan in hindi

हस्त मैथुन, अति स्त्री प्रसंग, अनेक जीर्ण रोग, पौष्टिक भोजन का निरन्तर अभाव, स्वप्नदोष, जननेन्द्रियों के स्थानीय रोग, सुजाक, मदिरापान, अफीम ,चरस, भांग तथा अन्य नशीली वस्तुओं का अत्यधिक प्रयोग, मैथुनेच्छ की अधिकता, वीर्य प्रमेह, वीर्य की अधिकता, गुदा सम्भोग, वीर्य की गर्मी, तिलाओं का प्रयोग, दिल, दिमाग तथा यकृत की कमजोरी, वीर्य का पतलापन, मूत्राशय में रेत, उदर कृमि, स्त्री की योनि का तंग तथा शुष्क होना, सुपारी पर मैल का जम जाना, सुपारी की बबासीर, सुजाक, मूत्र मार्ग की खराश(खुजली), प्रोस्टेट ग्लैन्ड की शोथ(सूजन) आदि कारणों से शीघ्रपतन का रोग होता है।

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शीघ्रपतन में-रोगी की मानसिक स्थिति अधिक जिम्मेदार है। सम्मान के प्रति घबराहट, भय, जल्दबाजी, हीनभावना आदि इसके मानसिक स्थिति के कारण है। किन्तु उस समय मैथुन-सुख से अतृप्त स्त्री की ओर से भी फटकार और जली-कटी बातें (व्यंग्य) यदि सुनने को मिल जायें तो स्थिति अत्यन्त ही दयनीय हो जाती है। एक प्रकार से ऐसा रोगी पुरुष अपने ऊपर से विश्वास खो बैठता है अर्थात स्वयं को नंपुसक मान बैठता है, बल्कि जिस स्त्री से उसे परास्त होना पड़ा, उसी स्त्री के सहयोग, और सहानुभूति, सान्त्वना, सन्तोष की बातों से शनैः शनैः रास्ते पर आ जाता है।

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शर्मीली प्रकृति की स्त्रियाँ पति के यौन समागम में असफल रहने पर मन ही मन असन्तोष का अनुभव करती हैं किन्तु वे लज्जावश चुप रहती हैं। किन्तु तेज-तर्रार औरतें अपने असन्तोष को व्यक्त करते हुए पति को लानत-मलानत देकर लज्जित करती हैं तथा मजाक उड़ाती हैं फलस्वरूप तिल का ताड़ (राई का पर्वत) बनाकर मामूली सी कमी जीवन का बड़ा बोझ बन जाती है। ऐसी स्थिति में समझदार (दक्ष) पत्नियां पति के प्रति प्यार एवं सहानुभूति प्रकट कर उन्हें तसल्ली देकर उत्साहित कर अपने जीवन नौका को आसानी से खींच ले जाती हैं।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के नुकसान : shighrapatan ke nuksan in hindi

शीघ्रपतन रोगी की पत्नी के मन और स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। स्त्री उत्तेजना में होती है, रोगी पुरुष शिथिल पड़ जाता है, तो वह उसी उत्तेजना की स्थिति में रह जाती है, लगातार इस अवस्था के फलस्वरूप उसे हिस्टीरिया, स्नायुदुर्बलता, आदि मानसिक रोग हो जाया करते हैं। आगे चलकर चिन्ता तथा दुःख आदि मिलकर कोई न कोई शारीरिक रोग भी उत्पन्न कर देते हैं।

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) के उपचार में आचार्य सुश्रुत का चिकित्सा सूत्र :

(1) “पक्वाधानालयोऽपान काले कर्षति चाप्यधः।
समीरण शकृन्मूत्रं शुक्र गभर्तिवानि च।”

(2) हर्षोऽन्नपान शुक्रस्थे बल शुक्र करं हितम।
विबद्ध मार्ग दृष्टा वा शुक्रदद्यद्विरे चनम् ॥”

अर्थात-
(1) पक्वाधान, वृषण, बस्ति, शिश्न, नाभि, उरु, गुदा, गर्भाशय आदि अपानवायु के क्षेत्र हैं। इनमें ये वायु शुक्र, आर्तव, मूत्र-मल, तथा गर्भ का आवश्यक काल तक धारण करती है तथा काल पूरा होने पर निकाल देती है। अतः शीघ्रपतन में अपानवायु का प्रकुपित व विकृत होना परिलक्षित है तथा प्रकुपितावस्था को शान्त करना ही चिकित्सा सूत्र है।

(2) मन के अवसाद, चिन्ता, भय को दूरकर मन को हर्षण करने वाली धैर्य, शन्ति, स्थिरता प्रदायक, मानसिक चिकित्सा तथा बलकारक, शुक्रवर्धक आहारविचार का प्रयोग, चिकित्सा में शीघ्र सफलतादायक है।

चिकित्सक औषधियों द्वारा रोगी के शरीर को हष्ट-पुष्ट बना सकता है किन्तु जब तक मन दृढ़ नहीं होगा, चिकित्सा में आशातीत सफलता असम्भव है। अतः पत्नी का सहयोग भी आवश्यक है। चिकित्सक द्वारा रोगी को यह आश्वासन अवश्य ही देना चाहिए कि-प्रत्येक मनुष्य के जीवन में प्रायः कभी-कभी ऐसी परेशानियां होनी स्वभाविक हैं।

रोगी को बहुमूल्य उत्तेजक, बलबर्धक, कामोत्तेजक, अधिक औषधियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए अन्यथा अधिक उत्तेजना होकर रोग बढ़ सकता है।

वैसे नंपुसकता के अन्तर्गत वर्णित सभी औषधियाँ, शीघ्रपतन में भी लाभप्रद हैं। क्योंकि शीघ्रपतन भी एक प्रकार की नपुंसकता की ही स्थिति है। आइये जाने shighrapatan kaise roke in hindi,

शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) की आयुर्वेदिक दवा : shighrapatan ayurvedic medicine

✦ जायफल – 3 ग्राम
✦ बबूल की गोंद (भुनी हुई) – 3 ग्राम
✦ कुन्दर – 3 ग्राम
✦ चुनियां गोंद – 3 ग्राम
✦ मस्तंगी – 3 ग्राम
✦ इमली के बीजों की गिरी – 6 ग्राम
✦ जामुन की गुठली की गिरी – 6 ग्राम
✦ शुद्ध भांग – 12 ग्राम
✦ विशुद्ध केसर -डेढ़ ग्राम

सभी को शुद्ध गुलाबजल के रस में खरल करके चने के आकार की गोलियां बना लें। ये 2 से 3 गोलियां रात्रि में सोते समय खिलायें। स्तम्भन तथा पौरुष शक्ति के लिए अत्युत्तम औषधि है। इसके प्रयोग से शीघ्रपतन दूर हो जाता है।

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शीघ्रपतन (शीघ्र स्खलन) का घरेलू इलाज : shighrapatan ka gharelu ilaj in hindi

1- हल्दी से शीघ्र स्खलन का इलाज –
कच्ची हल्दी के रस 10 ग्राम को10 ग्राम शहद के साथ चाटें। रात्रि को सूखी हल्दी का चूर्ण 2 ग्राम लेकर 5 ग्राम शहद में मिलाकर चाटें, ऊपर से औटाया हुआ ठन्डा बकरी का दूध पियें। निरन्तर डेढ़ माह के प्रयोग से वीर्य गाढ़ा होकर बार-बार मूत्र आना बन्द हो जायेगा तथा अरुचि, मन्दाग्नि, बैचैनी, घबराहट, चिड़ाचिड़ापन आदि दूर होकर, वीर्य सम्बन्धी पुराने से पुराने विकार दूर होकर स्तम्भन शक्ति में वृद्धि के कारण स्त्री-पुरुष दोनों का मन प्रसन्नता से गुलाब के फूल की भाँति खिल उठेगा।

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2- राई से शीघ्रपतन का उपचार –
मस्टर्ड (राई) को जल में भिगोकर रख दें। जब इसका प्रभाव जल में आ जाये, तब इस जल से सर्दी के मौसम में मैथुन से पूर्व सुपारी और लिंग को मलकर धोयें (गर्मी के मौसम में बर्फ युक्त ठन्डे जल से लिंग और सुपारी को
धोयें ऐसा करने से लिंग में अधिक रक्त आ जाने से मैथुन के समय जोश और कठोरता आ जाती है।

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3- वंशलोचन से शीघ्र स्खलन का उपाय –
गिलोय सत्व और असली वंशलोचन समभाग लें। वंशलोचन को कूटकर दोनों को मिलालें। यह प्रतिदिन 2 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सेवन करने से एक सप्ताह में वीर्य गाढ़ा हो जाता है और स्वतः स्खलित नहीं होता है।

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4- भिन्डी से शीघ्रपतन का देसी इलाज –
भिन्डी की जड़ का चूर्ण 10 ग्राम प्रतिदिन दूध के साथ सेवन करें। अत्यन्त शक्तिदाता है।

5- सफेद प्याज से शीघ्रपतन का रामबाण इलाज – shighrapatan ka ramban ilaj
अजवायन को सफेद प्याज के रस में 3 बार भिगोकर सुखाकर रखलें। इसके चूर्ण को 10 ग्राम घी तथा 20 ग्राम शक्कर के साथ खाने से 21 दिन में पूर्ण लाभ हो जाता है। यह अत्यन्त ही वीर्यबर्द्धक, शक्तिप्रद बाजीकरण योग है।

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6- दालचीनी से शीघ्र स्खलन का घरेलू नुस्खा –
दालचीनी का बारीक चूर्ण 4-4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गर्म दूध से प्रयोग करें। इससे दूध पच जाता है तथा असीम वीर्य वृद्धि होकर शक्ति प्राप्त होती है।

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7- जैतून तेल से इलाज –
दालचीनी का तेल 10 ग्राम तथा जैतून का तैल 30 ग्राम आपस में भली भाँति मिलाकर रख लें। इस तेल की लिंग पर मालिश करने से आशातीत वीर्य वृद्धि होकर शीघ्रपतन से मुक्ति मिल जाती है। प्रयोग काल में लिंग को ठन्डे जल से भीगने से बचाये रखें।

8- अरन्ड बीज का शीघ्रपतन में उपयोग –
सरसों और अरन्ड के बीज 10-10 ग्राम कूट-छानकर तिल्ली के 50 ग्राम तेल में मिलाकर सुरक्षित रखलें। रात को सोते समय लिंग पर मालिश करने से लिंग की कमजोरी दूर हो जाती है।

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9- गाय के दूध से शीघ्रपतन का देसी इलाज –
60 ग्राम गाय के घी में 1 किलो गाय के दूध के खोआ को, हल्का सुर्ख भूनें। फिर 1 किलो देशी चीनी की 1 तार की चाशनी पकाएं। चूल्हे से उतारते समय 10 ग्राम छोटी इलायची का कपड़छन चूर्ण डालकर बर्फी बना लें। इसके प्रयोग से अपार वीर्य की वृद्धि हो जाती है।

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10- इमली से शीघ्र स्खलन का उपचार –
इमली के बीजों को रात में भिगोकर सबेरे उन्हें छील-पीसकर गुड़ मिलाकर 6-6 ग्राम की गोलियाँ बना लें। एक-एक गोली सुबह-शाम लेने से वीर्य की कमजोरी दूर होकर पुरुषार्थ बढ़ता है। गरीबों के लिए अति उत्तम योग है।

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11- इमली के बीजों से शीघ्र स्खलन का इलाज –
इमली के बीजों को भाड़ में भुनवाकर उनका छिलका उतार दें तथा गूदे को पीसकर चूर्ण बनालें। चूर्ण के समभाग मिश्री मिलाकर रख लें। नित्य प्रातः 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से धातु पुष्ट हो जाती है। वीर्यप्रमेह, स्वप्नदोष, शीघ्रपतन आदि रोग नष्ट हो जाते हैं। स्त्रियों के प्रदर रोग में भी अत्यन्त उपयोगी है।

12- बादाम से शीघ्र स्खलन का घरेलू उपाय -shighrapatan ke gharelu upay
बादाम की (भिगोकर छीली गई गिरियां) 6, कालीमिर्च के दाने 6, सौंठ.2 ग्राम, मिश्री इच्छानुसार मिला लें और सील पर घोटकर चाटें। ऊपर से दुग्धपान करने से शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।

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13- शीघ्रपतन नष्ट करने का आसान उपाय –
12 बादाम की गिरियां (रात्रि को भिगोकर सुबह उन्हें छीलकर पीस लें) फिर कलईदार पीतल की कड़ाही में देशी घी डालकर उसमें पिसे हुए बादामों को डालकर सेकें, लाल होने से पूर्व ही उसमें 125 ग्राम दूध डालें, इसे गर्म-गर्म पी जायें। इसके प्रयोग से शरीर पुष्ट होकर वीर्य वृद्धि हो जाती है तथा दुर्बलता व शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।

14- धनियां से शीघ्रपतन का उपचार –
धनियां व मिश्री सममात्रा के योग से तैयार चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में ताजा ठन्डे पानी के साथ प्रतिदिन लगातार कम से कम एक सप्ताह प्रयोग करने से, अनियमित स्वप्नदोष दूर होकर वीर्य सम्बन्धी अनेक विकारों (मूत्रेन्द्रिय की जलन, उपदंश, सुजाक) से मुक्ति मिल जाती है। गर्म चीजों से परहेज रखें।

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15- लौंग के शीघ्रपतन में उपाय –
लौंग चबाकर उसकी लार जननेन्द्रियों पर लगाकर सहवास करने से (शीघ्रपतन) नष्ट होता है। मैथुन शक्ति बढ़ जाती है।

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16- सेब से शीघ्र स्खलन का इलाज –
एक मीठा सेब छीलकर उसमें चुभोकर जितनी लौंग आ सके (किसी चीनी-मिट्टी के बर्तन में एक सप्ताह तक पड़ा रहने दें) तत्पश्चात् लौंग निकाल कर शीशी में सुरक्षित रख लें। 4 लौंग प्रतिदिन दूध के साथ चबाने से स्तम्भन-शक्ति में आशातीत वृद्धि हो जाती है। इन्द्रिय की दुर्बलता समाप्त होकर, पुरुष शक्ति से पूर्ण हो जाता है।
नोट-स्वप्नदोष के रोगी लौंग का सेवन कदापि न करें।

शीघ्रपतन के रोगी का पथ्य व अपथ्य :

⚫ इनका सेवन करना चाहिये –

तेल की मालिश, उबटन, स्नान, सुगन्धित ताजे पुष्प, उत्तमोत्तम आर्कषक वस्त्राभूषण, आदि तथा जौ, गेहूँ, उड़द, अरहर, छिले आलू, घुइया, गोभी, शकरकन्द, पेठा, केला, लौकी, जिमीकन्द, चौलाई, दूध, दही, घी, मावा, मिश्री, दूध मलाई, सेव, अनार, घी, गुड़, कचालू, गुलाब जामुन, घेवर, फैनी, मालपुआ, पूड़ी आदि पौष्टिक पदार्थ पथ्य हैं।

⚫ इनका त्याग करें –

अधिक खटाई, तेल, लाल मिर्च, व्रत, उपवास, अधिक श्रम, मैथुन, चिन्ता, दिन की निद्रा, व्यभिचार, शोक, भय, अधिक चलना, सर्दी गर्मी में रहना, सड़ा तथा बासी आहार करना, प्रौढ़ा या वृद्धा से विषय करना, हस्तमैथुन, गुदा मैथुन आदि अप्राकृतिक मैथुन सभी अपथ्य है।

(दवा व नुस्खों को वैद्यकीय सलाहनुसार सेवन करें)

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