पढ़ो समझो और करो | Padho Samjho aur Karo By Gita Press
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पढ़ो समझो और करो गीता प्रेस, गोरखपुर से प्रकाशित एक ज्ञान-वर्णन पुस्तक है, जिसका उपशीर्षक जीवन में ब्रह्मज्ञान को उतार लाने से संबंधित है। पुस्तक का मुद्रण जैन विश्व भारती, लाहौर ने किया था और पता नीलामेर, गोरखपुर दर्ज है। पुस्तक लगभग १५० पृष्ठों की है और इसके अब तक अनेक संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं — संवत् २०६५, २०६८ और २०६९ के संस्करण मिलते हैं।
पुस्तक का शीर्षक ही इसकी विधि बता देता है — पहले पढ़ो, फिर समझो, और उसके बाद करो। इसमें शास्त्रीय ज्ञान को केवल पढ़ने के लिए नहीं, जीवन में उतारने के लिए प्रस्तुत किया गया है। प्रत्येक छोटे अध्याय में एक विचार दिया गया है जिसे पाठक सीधे अपने जीवन में अमल कर सकता है। संदेश सरल भाषा में होने के कारण पाठना आसान है।
ज्ञान-अध्ययन और आत्म-विकास में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। शिक्षा-संस्थानों में संवाद-छात्रों, प्रवचनकारों तथा जीवन में सिद्धांत और अभ्यास दोनों चाहिए ऐसे लोगों के लिए यह ग्रंथ उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- जीवन में आदर्श तथा कर्तव्य
- अच्छी बातें पढ़ने, समझने तथा अपनाने के नियम
- नीति तथा सदाचार
- सरल प्रेरक निर्देश
पुस्तक की मुख्य बातें
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