वृहद् तांत्रिक मुद्रा महाविज्ञान – Vrihad Tantrik Mudra Mahavigyan
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शीर्षक-पृष्ठ पर पुस्तक का नाम वृहद् तांत्रिक मुद्रा महाविज्ञान अंकित है और लेखक के रूप में आचार्य पं. राजेश दीक्षित का नाम छपा है। प्रकाशन-पृष्ठ पर अंतरराष्ट्रीय पुस्तक-क्रमांक 81-87250-23-2 और मूल्य एक सौ पाँच रुपये अंकित हैं तथा मुद्रक के रूप में राजकृष्ण प्रेस, अगरा का नाम दिया गया है। प्रथम छाप का वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वादशी के रूप में मुद्रित मिलता है। एक पृष्ठ पर अंग्रेज़ी शीर्षक भी साथ छपा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अंग्रेज़ी पाठकों के लिए अनुवाद-संदर्भ मौजूद है।
पुस्तक के आरंभ में पंद्रह तंत्र-शास्त्रों की सूची दी गई है, जिसमें सिंह, मुनिन्द्र, कैल, वेद, नागर, ऋषि, वास्तु, पौरोहित्य, ज्योतिष, वैदेहि, मार्गलोक तथा कनघमहोत्सव जैसे ग्रंथ शामिल हैं और बताया गया है कि यह ग्रन्थ उन्हीं ग्रंथों के आधार पर तैयार किया गया है। इसके बाद दो शब्द और समर्पण नामक अनुभाग आते हैं, जिनमें से समर्पण में मित्रों और शिष्यों के नाम दिए गए हैं। उसके बाद विषय-सूची में मुद्राओं के प्रकरण अलग-अलग पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं और उनमें श्री विष्णु, श्री राम, श्री गणेश, श्री शिव, श्री हनुमान तथा बालाजी की मुद्राएँ प्रमुख हैं।
यह पुस्तक तंत्र-शास्त्र के अध्ययन के लिए एक संदर्भ-ग्रन्थ है और इसमें अनेक प्राचीत तंत्र-ग्रंथों का अध्ययन एक साथ किया गया है। मुद्राओं की रचना-शैली और साधना-पद्धति का विवरण इसकी मुख्य विशेषता है। यह ध्यान रखने योग्य है कि यहाँ वर्णित मुद्राएँ, मन्त्र, दीक्षा और साधनाएँ आधुनिक विज्ञान से प्रमाणित नहीं हैं, इनका कोई चिकित्सकीय दावा नहीं है और इनका उपयोग किसी अन्य व्यक्ति पर प्रभाव या क्षति डालने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी तांत्रिक साधना से पहले योग्य और अनुभवी गुरु से मार्गदर्शन लें।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- मंत्रों का अर्थ, उच्चारण तथा जाप-विधि
- साधना-क्रम, संख्या तथा नियम
- यंत्र, ताबीज तथा उनके प्रयोग
- फल, सावधानियाँ तथा सामान्य प्रश्न
पुस्तक की मुख्य बातें
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