Swami Rama Tirtha Granthavali – 10
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली के खण्ड दसरे के रूप में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके सदुदेश का भाग दस दिया गया है। शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ अंकित है। पैमाना लगभग 125 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर संस्करण-विवरण दिया गया है — प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, अक्तूबर १९२१ और अप्रैल १९४८ तथा मूल्य डाक-ट्रय सहित — और साथ में विना जिन्द्र अथवा सजिल्ट्ट के कुठक्कर का उल्लेख भी है। अगला पृष्ठ अंग्रेज़ी में छपा है, जिसमें लिखा है कि छपाई Ram Shanker Bajpai ने Lucknow Steam Printing Press, Lucknow से की गई।
इस खण्ड में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का दसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक और आत्मज्ञान-सम्बन्धी विचारों का संकलन है और अनेक प्रकरणों में उनके अनुभवों का वर्णन मिलता है। यह पुस्तक वेदान्त-पाठकों के लिये उपयोगी है। पृष्ठ पर यह भी उल्लेख है कि जिन्हें विना जिन्द्र अथवा सजिल्ट्ट के कुठक्कर में यह खण्ड मिलता है, वे भी इसे प्राप्त कर सकते हैं, और साथ में यह भी दर्ज है कि इसमें अंग्रेज़ी में छपा छाप-विवरण भी परिशिष्ट के रूप में दिया गया है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 10)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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