Swami Rama Tirtha Granthavali – 26
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खंड दूसरा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग २६ दिया गया है। पैमाना लगभग 163 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार और मई १९२४ की तिथि दर्ज है तथा फुटकर बिना जिल्द अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में उनके छब्बीसवें सदुदेश-भाग का संकलन दिया गया है, जिसमें उनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक और आत्मज्ञान-सम्बन्धी विचारों का वर्णन मिलता है, और विषय-सूची में प्रत्येक प्रकरण का पृष्ठ-अंक भी दिया गया है, जिससे पाठक सीधे सही प्रकरण तक पहुँच सकता है। पढ़ने वाला इन प्रवचनों से संत के जीवन-दर्शन को समझ सकता है।
इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का छब्बीसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक और आत्मज्ञान-सम्बन्धी विचारों का संकलन मिलता है, और छपाई के विवरण से यह पता चलता है कि पुस्तक लखनऊ से छपी थी।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 26)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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