Swami Rama Tirtha Granthavali – 04
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली के खण्ड चौथे के रूप में प्रकाशित हुई है, जिसमें उनके सदुदेश का भाग चार दिया गया है। शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ अंकित है। पैमाना लगभग 125 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर वार्षिक मूल्य के हिसाब से सारी या डाक-ट्रय सहित सजिल्ट्ट के कुठक्कर का उल्लेख है, साथ ही प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, आगम १९२० और प्रथम आवृत्ति १९७१ दर्ज है। नीचे मैनेजर के रूप में श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, भ्रमोनिवास पार्क, लखनऊ का पता दिया गया है।
पुस्तक का आरम्भ भूमिचर्या प्रकरण से होता है, जिसमें बताया गया है कि भारत वर्ष में दिव्या हुआ स्वामी रामतीर्थ जी का यह व्याख्यान एक छुपी हुई पुरस्तिका के प्रकार में लुप्त था और इस अमूल्य ग्रन्थ परमहितकारक उपदेश्य के अंक को जनता के हृदयाग्र के लिये प्रकाशित किया गया है, तथा पाठकों से यह भी निवेदन है कि इस प्रकार के ग्रन्थों को पढ़कर उनके विचारों को जीवन में उतारें। यह पुस्तक आध्यात्मिक पाठकों के लिये उपयोगी है।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 4)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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