Swami Rama Tirtha Granthavali – 06
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यह पुस्तक स्वामी रामतीर्थ, उनके सदुदेश-भाग ६ नाम से प्रकाशित हुई है, जिसे श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड छठा और वर्ष पहला बताया गया है। पैमाना लगभग 131 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, फरवरी १९२१ और पौष १९७७ की तारीखें तथा वार्षिक मूल्य के हिसाब से डाक ट्रय सहित का उल्लेख मिलता है। कुठक्कर में डाक ट्रय अलग रखने और सजिल्ट्ट संस्करण का भी ज़िक्र है।पाठ में उनके द्वारा किए गए अनुभवों का वर्णन भी सहज भाषा में मिलता है।
अगला पृष्ठ अंग्रेज़ी में छपा है, जिसमें लिखा है कि छपाई K. C. Banerjee ने Anglo-Oriental Press, Lucknow से की गई और प्रकाशन का काम श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग के सचिव Surjan Lal Pande ने किया, वर्ष १९२१। इस भाग में उनके द्वारा प्रतिपादित भक्ति और आत्मज्ञान सम्बन्धी विचारों का संकलन है, जिनमें अनेक उदाहरण और प्रवचन-अंश उद्धृत किए गए हैं, और पाठ में उनके सत्संग के अनेक प्रसंग भी उद्धृत किए गए हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 6)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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