Swami Rama Tirtha Granthavali – 05
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यह पुस्तक स्वामी रामतीर्थ, उनके सदुदेश-भाग ५ नाम से प्रकाशित हुई है, जिसे श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड पाँचवाँ और वर्ष पहला बताया गया है। पैमाना लगभग 131 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ दिया गया है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, जनवल १९२० और आखिर १९७७ तथा वार्षिक मूल्य के हिसाब से डाक ट्रय सहित की जानकारी भी मिलती है। अगला पृष्ठ विषयानुक्रम है, जिसमें निबंधदर्शन, रामपरिवेश, अवतारस्य, सफलता की कुंजी, सफलता का रहस्य और आत्मछत्ता जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं।
पृष्ठ पर छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिसमें लिखा है कि छपाई K. C. Banerjee ने Anglo-Oriental Press, Lucknow से की गई और प्रकाशन का काम श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग के सचिव स्वामी एन. एस. स्वयम ज्योति ने किया, वर्ष १९१९। इस भाग में रामतीर्थ ने अपने अनुभवों का सार प्रस्तुत किया है, जिसमें अन्तर्मुखी साधना की प्रक्रिया और जीवन में आने वाली कठिनाइयों से निपटने के उपाय भी बताए गए हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 5)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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