Swami Rama Tirtha Granthavali – 09
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यह पुस्तक श्री राम-वर्षा भाग प्रथम नाम से प्रकाशित हुई है, जिसे श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खण्ड पहिला बताया गया है और जिसमें उनका सदुदेश-भाग ९ दिया गया है। पैमाना लगभग 131 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर वर्ष दूसरा अंकित है। प्रकाशक श्री रामतीर्थ पण्डितकेशन लीग, लखनऊ बताया गया है और प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, जनवल १९२२ तथा भागवय १९४८ के साथ मूल्य डाक ट्रय रहित, विना जिल्द अथवा सजिल्ट्ट कुठक्कर का उल्लेख भी मिलता है। अगला पृष्ठ छापा हुआ है, जिसमें पाठ सी. गिंद हरा, पंचिन्द्र मिट्टर मैं, लावण्डा का उल्लेख है।
इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का नवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके द्वारा प्रतिपादित दार्शनिक और आत्मज्ञान-सम्बन्धी विचार, उपदेश और अनुभवों का संकलन है, और पुस्तक में उनके द्वारा दिये गये प्रवचनों का क्रमबद्ध संकलन है, जिसमें प्रारम्भ में विषय-सूची भी दी गई है तथा अनेक स्थलों पर पाठक के लिये संदेश रूप में पंक्तियाँ छोड़ी गई हैं। इसमें आत्मज्ञान की अनुभूति और कर्म-फल के संबंध में उनके विचार भी मिलते हैं।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
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- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 9)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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