Swami Rama Tirtha Granthavali – 28
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यह पुस्तक श्री रामतीर्थ ग्रन्थावली का खंड चौथा है, जिसमें स्वामी रामतीर्थ का सदुदेश-भाग २८ दिया गया है। पैमाना लगभग 128 पृष्ठ का है।
शीर्षक-पृष्ठ पर प्रकाशक श्री रामतीर्थ पब्लिकेशन लीग, लखनऊ अंकित है, साथ में प्रथम संस्करण प्रति दो हजार, सितम्बर १९२४ और भाद्र १९८२ की तारीखें तथा फुटकर जिल्द अथवा सजिल्ट्ट संस्करण का उल्लेख भी है।इस भाग में स्वामी रामतीर्थ के सदुदेश का अट्ठाईसवाँ भाग दिया गया है, जिसमें उनके विचारों का संकलन तथा अनेक प्रकरण मिलते हैं, और छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में दिया गया है, जिससे पुस्तक के छपने के स्थान और वर्ष की जानकारी मिलती है।
अगला पृष्ठ विषय-सूची है, जिसमें भारत वर्ष, धर्म और सद्गुण-विवार, श्री और सीता भक्ति, सखा का संन्यास, ध्यान का समाधि, आत्माभासमय, राम और आनन्द की कुंजहार जैसे प्रकरण पृष्ठ-संख्याओं के साथ दिए गए हैं, और नीचे छपाई का विवरण अंग्रेज़ी में आया है, जिसमें लिखा है कि छपाई K. C. Banerjee ने Anglo-Oriental Press, Lucknow से की गई, वर्ष १९२४।
यह पुस्तक किसके लिए उपयोगी है — विद्यार्थियों, जिज्ञासुओं, साधकों तथा सामान्य पाठकों — सभी के लिए। चाहे इसे अध्ययन के लिए पढ़ें या जानकारी एवं आत्म-विकास हेतु, यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी। विषय की गहराई में जाने से पहले इससे मूल आधार मजबूत होता है।
कैसे पढ़ें — फ़ाइल पूरी PDF में है, जिसे मोबाइल, कंप्यूटर या किसी भी PDF ऐप में बिना इंटरनेट के पढ़ा जा सकता है। नीचे दिए बटन से इसे तुरंत और मुफ़्त डाउनलोड करें — कोई साइन-अप, सदस्यता या शुल्क नहीं।
- स्वामी रामतीर्थ की रचनाएँ (भाग 28)
- प्रवचन तथा कविता
- अद्वैत तथा भक्ति
- प्रेरक विचार
पुस्तक की मुख्य बातें
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