
Last Updated on अक्टूबर 12, 2026 by admin
Govardhan Puja 2026 कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को दिवाली के अगले दिन मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा की लीला की स्मृति में गिरिराज और गौ-धन की पूजा होती है। अन्नकूट बनाकर प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना इसका मुख्य भाव है।
इस पूजा का केंद्र अहंकार के शमन और प्रकृति के सम्मान का भाव है। इंद्र के अभिमान को तोड़ने के लिए श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को इंद्र-यज्ञ के स्थान पर गोवर्धन और गौओं की पूजा करने को कहा था, यही परंपरा आज भी चली आ रही है।
Govardhan Puja 2026 कब है? तिथि और शुभ मुहूर्त
Govardhan Puja 2026 की तिथि को लेकर हर साल थोड़ा भ्रम रहता है, क्योंकि यह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर निर्भर करती है। यह तिथि दिवाली की अमावस्या के बाद आती है, इसलिए कभी-कभी दिवाली और गोवर्धन पूजा के बीच एक दिन का अंतर भी आ जाता है जब प्रतिपदा दो दिन रहे।
पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि जिस दिन सूर्योदय के समय और अपराह्न काल में व्याप्त हो, उसी दिन गोवर्धन पूजा मान्य होती है। गोवर्धन पूजा हमेशा दिवाली के अगले दिन दोपहर के समय की जाती है, क्योंकि उसी समय ब्रज में गोवर्धन धारण की लीला हुई थी।
| विवरण | समय |
|---|---|
| प्रतिपदा तिथि आरंभ | कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के सूर्योदय से |
| पूजा का मुख्य मुहूर्त | दोपहर, गो-धूलि वेला से पहले |
| अन्नकूट भोग का समय | मध्याह्न के बाद |
एक बात ध्यान रखें, प्रतिपदा पर चंद्र दर्शन नहीं होता, इसलिए इस दिन का मुहूर्त सुबह-सुबह नहीं, बल्कि दोपहर में माना जाता है। यदि आप विदेश में हैं तो अपने स्थानीय सूर्योदय के अनुसार प्रतिपदा देखें, भारतीय पंचांग को ज्यों का त्यों न अपनाएं।
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Govardhan Puja क्यों मनाई जाती है? श्रीकृष्ण और इंद्र की कथा
इस कथा का मूल स्रोत श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में है। ब्रज के लोग हर वर्ष इंद्र को प्रसन्न करने के लिए बड़ा यज्ञ करते थे। बालक श्रीकृष्ण ने नंद बाबा से पूछा कि हम सीधे दिखने वाले गोवर्धन पर्वत, गौओं और यमुना की पूजा क्यों नहीं करते, जो हमें प्रत्यक्ष पोषण देते हैं।
ब्रजवासियों ने श्रीकृष्ण की बात मानकर इंद्र-यज्ञ रोककर गोवर्धन पूजा की। इससे क्रोधित होकर इंद्र ने सात दिन तक प्रलयंकारी वर्षा कराई। तब श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को सात दिन-सात रात तक उठाए रखा और पूरे ब्रज को शरण दी। अंत में इंद्र का अभिमान टूटा और वे स्वयं आकर श्रीकृष्ण की शरण में आए।
यह लीला हमें सिखाती है कि प्रकृति ही प्रत्यक्ष देवता है। अन्न, जल, पर्वत और गौ-धन की उपेक्षा करके केवल अदृश्य कृपा की कामना करना अधूरी भक्ति है।
अक्सर लोग यह नहीं जानते कि
गोवर्धन केवल पर्वत नहीं, स्वयं श्रीकृष्ण का स्वरूप हैं। ब्रज में मान्यता है कि गिरिराज शिला में स्वयं कृष्ण का वास है, इसलिए गोवर्धन की परिक्रमा को कृष्ण की परिक्रमा के समान माना जाता है।
अन्नकूट और गोवर्धन पूजा में क्या अंतर है?
बहुत से लोग अन्नकूट और गोवर्धन पूजा को एक ही समझ लेते हैं, पर दोनों में सूक्ष्म भेद है। गोवर्धन पूजा मुख्य क्रिया है, जिसमें गिरिराज, गौ और श्रीकृष्ण का पूजन होता है। अन्नकूट उसका प्रसाद और उत्सव रूप है।
अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पहाड़। ब्रज में छप्पन प्रकार के व्यंजन बनाकर उसका पहाड़ जैसा ढेर गोवर्धन को अर्पित किया जाता है। 56 भोग का आंकड़ा यूं ही नहीं है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण ने सात दिन तक अन्न-जल ग्रहण नहीं किया था, तो बाद में ब्रजवासियों ने सात दिनों के आठ प्रहर के हिसाब से 7×8=56 व्यंजन बनाकर क्षमा-याचना की।
- गोवर्धन पूजा: पर्वत और गौ की प्रतीकात्मक पूजा, गोबर से गोवर्धन बनाना, परिक्रमा करना
- अन्नकूट: पकवानों का सामूहिक भोग, जो पूजा के बाद सभी में वितरित होता है
- घर पर आप छोटा अन्नकूट भी बना सकते हैं, 56 न हो तो 21 या 11 व्यंजनों से भी भाव पूरा माना जाता है
ध्यान दें, अन्नकूट में बासी या बाजार के पैकेट वाले भोग की बजाय घर का ताजा, सात्विक अन्न ही चढ़ता है।
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Govardhan Puja 2026 की संपूर्ण पूजा विधि क्या है?
घर पर गोवर्धन पूजा करने की विधि कठिन नहीं, पर क्रम का ध्यान रखना जरूरी है। सुबह घर और आंगन को गोबर से लीपने की परंपरा है, क्योंकि गोबर को पवित्र और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
तैयारी और सामग्री
- गाय के गोबर से बना गोवर्धन पर्वत, गाय-बछड़े की आकृति, रोली, चावल, फूल, धूप-दीप
- खील-बताशे, अन्नकूट के लिए चावल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी, हलवा, मिष्ठान्न
- गौ-पूजन के लिए माला, सिंदूर और गुड़-चना
विधि का क्रम
- प्रातः स्नान कर आंगन या पूजा स्थान में गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। साथ में गाय, बछड़ा, ग्वाल-बाल और श्रीकृष्ण की छोटी आकृतियां भी बनाएं। गोवर्धन को लेटा हुआ न बनाकर खड़ा पर्वत जैसा बनाएं, यही शास्त्रीय रूप है।
- मध्याह्न में गोवर्धन को जल, दूध, रोली-अक्षत और फूल अर्पित करें। धूप-दीप दिखाएं। फिर अन्नकूट का भोग सामने रखें।
- इसके बाद गोवर्धन की सात परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय हाथ में लोटे से जल गिराते जाएं और मन ही मन “गिरिराज धरण प्रभु तुम्हरी शरण” का स्मरण करें।
- गायों को तिलक कर माला पहनाएं, गुड़-चना खिलाएं। यदि गाय पास में न हो तो गाय की चित्र या मूर्ति का पूजन करें।
- अंत में अन्नकूट प्रसाद को परिवार और पड़ोस में बांटें। स्वयं भी उसी प्रसाद को ग्रहण करें, इसे जूठा नहीं माना जाता।
एक अनुभवी बात, गोवर्धन को कभी भी पैरों से नहीं लांघें और पूजा के बाद उसे तुरंत न हटाएं। शाम तक उसे वहीं रहने दें, फिर सम्मानपूर्वक जलाशय या पेड़ के नीचे विसर्जित करें।
कौन सी सूक्ष्म बातें अक्सर लोग नहीं जानते?
पहली बात, गोवर्धन पूजा में इंद्र की क्षमा-प्रार्थना भी जुड़ी है। कई घरों में केवल कृष्ण की स्तुति होती है, पर विधि में इंद्र के प्रति भी कृतज्ञता का मंत्र बोला जाता है कि हे इंद्र, आपका कोप शांत हो, आप भी वर्षा के देवता के रूप में पूज्य हैं। द्वेष नहीं, संतुलन इसका संदेश है।
दूसरी बात, गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा 21 किलोमीटर की मानी जाती है, पर घर पर सात छोटी परिक्रमा उसी का प्रतीक है। परिक्रमा हमेशा नंगे पैर और बिना जल्दबाजी के करनी चाहिए। जूते पहनकर या गाड़ी से परिक्रमा का फल नहीं मिलता, ऐसा ब्रज के संत कहते हैं।
तीसरी बात, गोबर के गोवर्धन में केमिकल रंग या प्लास्टिक की सजावट न करें। प्राकृतिक हल्दी, रोली और फूल ही उत्तम हैं। गोबर स्वयं औषधीय और पवित्र है, उसे कृत्रिम चीजों से ढकना दोष माना जाता है।
चौथी बात, अन्नकूट का भोग गोवर्धन को लगाने के बाद गायों को भी उसी में से खिलाना चाहिए। पहले गौ-ग्रास निकाले बिना मनुष्य का प्रसाद ग्रहण करना अधूरा माना जाता है। यही वह सूत्र है जो गोवर्धन पूजा को केवल पर्वत-पूजा नहीं, बल्कि गौ-संवर्धन का पर्व बनाता है।
अक्सर लोग यह गलती करते हैं कि दिवाली की रात के बचे हुए तेल के दीये से ही गोवर्धन पूजा कर देते हैं। गोवर्धन पूजा मध्याह्न की पूजा है, इसमें घी का दीया नया जलाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. Govardhan Puja 2026 किस दिन मनाई जाएगी?
A: Govardhan Puja 2026 कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को दिवाली के अगले दिन मनाई जाएगी। स्थानीय पंचांग में प्रतिपदा के सूर्योदय और दोपहर में व्याप्त होने पर उसी दिन पूजा मान्य होती है, इसलिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।
Q2. गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में क्या संबंध है?
A: गोवर्धन पूजा मुख्य पूजन क्रिया है और अन्नकूट उसका भोग-उत्सव है। गोवर्धन धारण की लीला के बाद ब्रजवासियों ने 56 भोग का पहाड़ बनाकर क्षमा-याचना की थी, उसी परंपरा को अन्नकूट कहा जाता है।
Q3. क्या घर पर गोबर के बिना गोवर्धन पूजा हो सकती है?
A: हां, यदि गाय का गोबर उपलब्ध न हो तो मिट्टी या आटे से गोवर्धन की आकृति बनाकर पूजा कर सकते हैं। भाव की शुद्धता मुख्य है, पर हो सके तो प्राकृतिक सामग्री ही उपयोग करें, प्लास्टिक या पीओपी से बचें।
Q4. गोवर्धन पूजा पर गाय की पूजा क्यों जरूरी है?
A: क्योंकि श्रीकृष्ण ने स्वयं गोवर्धन के साथ गौ-धन को भी पूज्य बताया था। गाय ब्रज की अर्थव्यवस्था और जीवन का आधार थी, इसलिए गोवर्धन पूजा में गौ-पूजन से ही पूजा पूर्ण मानी जाती है।
Q5. अन्नकूट में कितने पकवान बनाने चाहिए?
A: शास्त्रीय रूप से 56 पकवानों का विधान है, पर घर पर 21, 11 या 7 सात्विक व्यंजनों से भी अन्नकूट किया जा सकता है। मुख्य बात अन्न का सम्मान और प्रसाद को बांटकर खाना है, संख्या से अधिक भाव महत्वपूर्ण है।
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निष्कर्ष और आपका अगला कदम
गोवर्धन पूजा हमें याद दिलाती है कि हमारी रक्षा बड़ी-बड़ी कामनाओं से नहीं, बल्कि पास की प्रकृति, अन्न और गौ-धन के सम्मान से होती है। Govardhan Puja 2026 पर आप भी दोपहर के मुहूर्त में छोटा ही सही, पर भाव से गोवर्धन बनाकर अन्नकूट अर्पित करें।
आपका अगला कदम यह हो सकता है कि आज ही अन्नकूट के लिए सात्विक व्यंजनों की सूची बना लें और पूजा के बाद प्रसाद को केवल परिवार तक सीमित न रखकर किसी जरूरतमंद या पड़ोसी के साथ साझा करें, यही सच्चा अन्नकूट होगा।





