Adhyatma Vigyan

लक्ष्मी पूजा 2026: शुभ मुहूर्त, विधि, सामग्री और मंत्र

📅 9 अक्टूबर 2026 ✍️ admin ⏱️ 9 मिनट
लक्ष्मी पूजा 2026: शुभ मुहूर्त, विधि, सामग्री और मंत्र

लक्ष्मी पूजा 2026 दीपावली के दिन 20 अक्टूबर, मंगलवार को है। इस दिन लक्ष्मी पूजा का मुख्य मुहूर्त प्रदोष काल में रहेगा, जो शाम से रात तक स्थिर लग्न में होता है। इस मुहूर्त में माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की विधिपूर्वक पूजा करने से स्थिर धन और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

क्या आप भी इस बार पूजा में कोई कमी न रह जाए, इसे लेकर मन में उलझन महसूस कर रहे हैं? कई बार मुहूर्त, सामग्री और सही विधि को लेकर भ्रम हो जाता है। यहाँ आपको लक्ष्मी पूजा 2026 से जुड़ी हर जरूरी बात क्रमवार और सरल भाषा में मिलेगी, ताकि आप पूरे आत्मविश्वास के साथ पूजन कर सकें।

लक्ष्मी पूजा 2026 कब है? तारीख और शुभ मुहूर्त

दीपावली की अमावस्या पर ही लक्ष्मी पूजा होती है। पंचांग के अनुसार 2026 में यह पर्व 20 अक्टूबर को पड़ेगा। अमावस्या तिथि का आरंभ और समापन दोनों इसी दिन के आसपास रहेंगे, इसलिए मुख्य पूजन इसी रात किया जाएगा।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त कैसे तय होता है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि लक्ष्मी पूजा पूरे दिन कभी भी हो सकती है, पर ऐसा नहीं है। शास्त्रों में प्रदोष काल और वृषभ लग्न को सबसे स्थिर माना गया है। प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद के लगभग दो घंटे, और जब वृषभ लग्न चल रहा हो तो वह लक्ष्मी पूजा के लिए उत्तम है। क्योंकि वृषभ राशि स्थिर स्वभाव की है, इसलिए मान्यता है कि इस लग्न में की गई पूजा से धन घर में टिकता है।

ध्यान दें, हर शहर में सूर्यास्त का समय अलग होता है, इसलिए आपके शहर का मुहूर्त 10-20 मिनट आगे-पीछे हो सकता है। अपने स्थानीय पंचांग को एक बार अवश्य देख लें। महानिशीथ काल में जो पूजा होती है, वह विशेषकर तांत्रिक और व्यापारी वर्ग के लिए अलग से होती है, गृहस्थ लोगों के लिए प्रदोष काल ही मुख्य है।

लक्ष्मी पूजा की तैयारी और आवश्यक सामग्री क्या है?

पूजा की तैयारी एक दिन पहले से शुरू कर दें तो पूजन के समय भागदौड़ नहीं होती। घर की साफ-सफाई, विशेषकर तिजोरी, पूजा स्थान और मुख्य द्वार की सफाई को लक्ष्मी पूजन का पहला चरण माना जाता है।

पूजा सामग्री की पूरी सूची

आप इस सूची को पहले से जाँच लें, ताकि पूजा बीच में न रुके:

  • मूर्तियाँ/चित्र: माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की मूर्ति या चित्र
  • दीपक के लिए: मिट्टी के दीपक, घी, तेल, रुई की बत्तियाँ, कपूर
  • श्रृंगार और अर्पण: कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (बिना टूटा चावल), मौली, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग-इलायची
  • फूल और माला: कमल का फूल लक्ष्मी जी को अत्यंत प्रिय है, साथ ही गेंदा और गुलाब की माला
  • फल, मिठाई और भोग: बताशे, लड्डू, खील-बताशे, फल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)
  • धन का प्रतीक: चाँदी के सिक्के, रुपये, सोना, बही-खाता, कलम
  • अन्य: चौकी, लाल या पीला कपड़ा, जल का लोटा, आम के पत्ते, नारियल, धूप-अगरबत्ती

अक्सर अनदेखी होने वाली सामग्री

कई लोग केवल फूल-माला और मिठाई को ही सामग्री समझ लेते हैं। पर लक्ष्मी पूजा में कमलगट्टा (कमल के बीज की माला), कौड़ी और दक्षिणावर्ती शंख का भी अपना स्थान है। ये समृद्धि और स्थिरता के प्रतीक माने जाते हैं। साथ ही, पूजा में हल्दी की गाँठ रखना शुभ माना जाता है, क्योंकि हल्दी बृहस्पति का प्रतीक है जो ज्ञान और स्थिर धन देता है।

इसे भी पढ़ें: Sharadiya Navratri 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

लक्ष्मी पूजा विधि कैसे करें? चरणवार सरल प्रक्रिया

विधि को कठिन समझकर छोड़ें नहीं। इसे पाँच सरल चरणों में करें।

1. संकल्प और गणेश पूजन

आसन पर बैठकर हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर संकल्प लें कि आप किस उद्देश्य से पूजन कर रहे हैं। सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। बिना गणेश पूजन के कोई भी पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती, क्योंकि गणेश जी विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले) हैं। उन्हें दूर्वा, लड्डू और सिंदूर अर्पित करें।

2. कलश और वेदी स्थापना

चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मध्य में लक्ष्मी-गणेश को स्थापित करें। पास में जल से भरा कलश, उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें। यह कलश वरुण देव और सृष्टि के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।

3. लक्ष्मी, सरस्वती और कुबेर पूजन

अब माँ लक्ष्मी को कमल का फूल, गुलाब, कुमकुम और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। साथ में देवी सरस्वती (ज्ञान की देवी) और कुबेर (धन के रक्षक) का भी स्मरण करें। व्यापारी लोग अपने बही-खाते और कलम की भी पूजा इसी समय करते हैं, जिसे चोपड़ा पूजन कहते हैं।

4. धन और तिजोरी पूजन

जो सिक्के, नोट या आभूषण आपने रखे हैं, उन पर कुमकुम-अक्षत लगाकर पूजा करें। तिजोरी या जहाँ आप धन रखते हैं, वहाँ भी दीपक दिखाना न भूलें। मान्यता है कि लक्ष्मी वहीं टिकती हैं जहाँ स्वच्छता और हिसाब-किताब में ईमानदारी हो।

5. आरती, क्षमा प्रार्थना और प्रसाद

पूरे परिवार के साथ मिलकर लक्ष्मी जी और गणेश जी की आरती करें। अंत में हाथ जोड़कर जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद बाँटें।

दीपक का विशेष महत्व: कितने दीपक और कहाँ रखें?

लक्ष्मी पूजा में दीपक केवल रोशनी नहीं, बल्कि ज्ञान और आशा का प्रतीक है। अमावस्या की गहरी रात में दीपक ही लक्ष्मी को घर तक आमंत्रित करता है।

  • सबसे पहला दीपक पूजा की चौकी पर घी का जलाएँ। घी का दीपक सात्विकता और लक्ष्मी का प्रतीक है।
  • दूसरा दीपक तेल का मुख्य द्वार पर रखें, ताकि नकारात्मकता बाहर ही रहे।
  • एक दीपक तुलसी के पास, एक रसोई में और एक तिजोरी के पास अवश्य रखें।
  • यम के नाम का एक दीपक घर के बाहर दक्षिण दिशा में रखा जाता है, जो अकाल मृत्यु से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

अक्सर लोग दीपक को सीधे जमीन पर रख देते हैं। नीचे थोड़े अक्षत या एक छोटी थाली रखकर ही दीपक स्थापित करें। फूटा हुआ या टेढ़ा दीपक उपयोग में न लें।

इसे भी पढ़ें: धनवंतरी पुजा 2026: धनतयरस का मुहूर्त, विधि और खरीदारी नियम

लक्ष्मी पूजा के सिद्ध मंत्र और कथा का सार क्या है?

पूजा के सरल मंत्र

संस्कृत न आती हो तो चिंता न करें, श्रद्धा से कहे गए ये मंत्र भी फलदायी हैं:

लक्ष्मी बीज मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

यह सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है, इसे 108 बार जप सकते हैं।

महालक्ष्मी मंत्र:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

कुबेर मंत्र:

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।

मंत्र जप के बाद शांत बैठकर दो मिनट माँ को अपने घर में विराजमान मानकर ध्यान करें, यही सबसे बड़ी प्रार्थना है।

लक्ष्मी कथा का वास्तविक संदेश

लक्ष्मी कथा में उस ब्राह्मणी और उसकी बेटी की कहानी है जो निर्धनता के बावजूद हर दीपावली पर श्रद्धा से पूजन करती थीं। कथा का सार केवल चमत्कार नहीं, बल्कि यह है कि जहाँ परिश्रम, स्वच्छता, मीठी वाणी और दान की भावना होती है, वहीं लक्ष्मी स्थायी रूप से निवास करती हैं। आलस और कलह वाले घर में लक्ष्मी आकर भी नहीं टिकतीं।

अक्सर होने वाली गलतियाँ और ध्यान रखने योग्य सूक्ष्म बातें

  1. लक्ष्मी जी की मूर्ति में अक्सर लोग यह नहीं देखते कि उल्लू पर बैठी लक्ष्मी और कमल पर बैठी लक्ष्मी में अंतर है। दीपावली पर कमल पर बैठी, हाथ से धन वर्षा करती हुई लक्ष्मी की पूजा अधिक शुभ मानी जाती है, जो शांति और स्थिर धन का प्रतीक है।
  2. लक्ष्मी के साथ गणेश जी को हमेशा दायीं ओर रखें, बायीं ओर नहीं। यह विनायक और श्री का संतुलन बनाता है – गणेश बुद्धि देते हैं ताकि धन का सही उपयोग हो।
  3. पूजा में लोहे या स्टील के बर्तन में भोग न लगाएँ। पीतल, ताँबा या पत्तल का प्रयोग करें। प्लास्टिक की सामग्री से बचें।
  4. पूजा के बाद दीपक को फूँक मारकर न बुझाएँ। उसे स्वयं शांत होने दें । फूँक से अग्नि का अपमान माना जाता है।

इसे भी पढ़ें: सोमवती अमावस्या का महत्व और धन समृद्धि बढ़ाने के विषेश उपाय | Somvati Amavasya Ka Mahatva

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q1. लक्ष्मी पूजा 2026 की सही date क्या है?

A: लक्ष्मी पूजा 2026 दीपावली के दिन 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इस दिन कार्तिक अमावस्या है और प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन का मुख्य मुहूर्त रहेगा।

Q2. लक्ष्मी पूजा मुहूर्त कितने समय तक रहता है?

A: प्रदोष काल का मुहूर्त सामान्यतः सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटे तक रहता है। वृषभ लग्न के साथ यह अवधि और भी शुभ हो जाती है। अपने शहर के पंचांग के अनुसार सटीक समय देखना उत्तम है।

Q3. लक्ष्मी पूजा विधि में सबसे पहले किसकी पूजा होती है?

A: किसी भी शुभ कार्य की तरह लक्ष्मी पूजा में भी सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा होती है, उसके बाद कलश, फिर माँ लक्ष्मी, सरस्वती और कुबेर की पूजा की जाती है।

Q4. पूजा में दीपक घी का जलाएँ या तेल का?

A: चौकी पर माँ लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाना सबसे शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार और बाहर के लिए सरसों के तेल का दीपक उपयुक्त है। दोनों का अपना अलग महत्व है।

Q5. क्या लक्ष्मी पूजा में कथा सुनना जरूरी है?

A: हाँ, पूजा के बाद लक्ष्मी कथा सुनने या पढ़ने से पूजन पूर्ण माना जाता है। कथा सुनने से व्रत का संकल्प और धन के सही उपयोग की प्रेरणा मिलती है।

निष्कर्ष

लक्ष्मी पूजा 2026 केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि अपने घर, मन और कर्म को स्वच्छ करके समृद्धि को आमंत्रित करने का अवसर है। शुभ मुहूर्त में सही विधि, पूरी सामग्री और श्रद्धा से किया गया पूजन निश्चित रूप से फल देता है।

आपके लिए अगला व्यावहारिक कदम: आज ही सामग्री की सूची बनाकर एक-एक वस्तु जुटाना शुरू करें और 20 अक्टूबर की शाम के लिए अपने शहर का सटीक प्रदोष काल पंचांग में नोट कर लें, ताकि पूजा के समय कोई जल्दबाजी न रहे।

Share to...