आमलकी रसायन के फायदे ,उपयोग और नुकसान | Amalaki Rasayan benefits and Side Effects in Hindi

आमलकी रसायन क्या है ? : Amlaki Rasayan in Hindi

‘आमलकी रसायन’ नामक योग के फायदों का उल्लेख ‘रसतन्त्रसार व सिद्ध प्रयोग संग्रह’ (द्वितीय खण्ड) में मिलता है जो अष्टांग हृदय एवं चरक संहिता के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। इस योग का मुख्य घटक-द्रव्य आंवला है इसीलिए इस योग का नाम ‘आमलकी रसायन’ रखा गया है।

आयुर्वेद ने आंवले के गुणों की बहुत प्रशंसा की है और गुणों के आधार पर इसे वयस्या, आमलकी, वृष्या,शिव, अमृता, अमृतफल जैसे गुणवाचक नामों से सम्बोधित किया है और इसे ‘रसायन’ माना है। रसायन-गुण के कारण ही ‘त्रिफला’ के तीन फलों में इसकी गणना की गई है।

आंवला के विषय में विस्तृत लेख हमारी पुरानी पोस्ट “आंवला के गुण उपयोग फायदे और नुकसान” में प्रस्तुत किया गया है।

आंवले से निर्मित होने के कारण ‘आमलकी रसायन’ नामक इस योग में ‘आंवले’ की सभी विशेषताएं तो होती ही हैं साथ ही जिस विधि से आंवले से ‘आमलकी रसायन’ बनाई जाती है उस विधि के कारण इसकी गुणवत्ता और भी ज्यादा बढ़ जाती है। जरा (बुढ़ापा) और व्याधि (रोग) को जो दूर रखे उसे रसायन कहा है। आंवले में यह गुणवत्ता है अतः आंवले से तैयार किये गये इस योग को आमलकी रसायन कहा है।

यह योग सरल और सस्ता होते हुए भी दिव्यफल देने वाला, सौम्य, शीतवीर्य और स्वास्थ्य तथा आयु की रक्षा करके वृद्धि करने वाला है। गरीब और अमीर सभी के लिए इसका सेवन करना सम्भव है।

आमलकी रसायन के घटक द्रव्य : Amlaki Rasayan Ingredients in Hindi

✦ आंवले इच्छानुसार मात्रा में
✦ पलाश के वृक्ष का मोटा, ताज़ा (हरा) और लम्बा तना
✦ गीली मिट्टी
✦ अरणे (जंगली) कण्डे
✦ घी और शहद विषम मात्रा में।

आमलकी रसायन बनाने का तरीका :

पलाश को ढाक, खाखरा और टेसू भी कहते हैं। इसका मोटा तना काट लें और इसमें गिलास के समान गड्डा करें। चारों तरफ मोटा किनारा छोड़ कर गढ्डा गहरा बना लें। इसे गिलास की तरह खड़ा रख कर, गढ्डे में जितने आंवले भरे जा सकें उतने भर दें।

आंवले ताजे, बेदाग और पके हुए होना चाहिए। अब जैसे शीशी पर डाट या डिब्बे पर ढक्कन लगाते हैं उसी प्रकार पलाश के तने का ही ढक्कन बना कर इस पर रख कर मुंह बन्द कर दें। इसके सब तरफ़ से मोटा कपड़ा लपेट कर ऊपर से गीली मिट्टी को खूब
गाढ़ी-गाढ़ी, लगभग १-१ इंच मोटाई में, लपेट कर थोड़ा सूखने दें। जंगली कण्डों के ढेर के मध्य रख कर कण्डों को सुलगा दें। चारों तरफ़ लगभग ४-४ फिट की दूरी पर कच्ची दीवार खड़ी कर दें ताकि हवा न लगे और कण्डे खूब देर तक जलते रहें।

२-३ घण्टे में आंवले अच्छी तरह पक कर नरम हो जाते हैं आग ठण्डी होने पर बाहर निकाल कर, ठण्डा होने पर ढक्कन हटा दें तथा आंवलों को निकाल कर गुठली हटा कर, जितना वज़न आंवलों का हो उसके बराबर घी तथा डेढ़ गुना शहद मिला कर मसल लें ताकि तीनों मिल कर एक जान हो जाएं बस, बर्नी में भर लें।

आमलकी रसायन की मात्रा और खाने की विधि : Amalaki Rasayan Dosage in Hindi

इसकी मात्रा ५० ग्राम से लेकर २०० ग्राम तक की है। इसका सेवन करते हुए अन्न जल का कठोरता पूर्वक त्याग रखना अनिवार्य होता है। जल पीना तो दूर, स्पर्श करने तक को मना किया गया है। आहार के नाम पर दिन में २-३ बार सिर्फ गाय का दूध ही ले सकते हैं, अन्य कोई पदार्थ नहीं।

इस रसायन को शुरू करने से पूर्व किसी कुशल आयुर्वेदाचार्य वैद्य अथवा किसी आयुर्वेदिक औषधालय की देखरेख में ‘पंचकर्म’ विधि से शरीर-शुद्धि करवा लेना अनिवार्य है।

इसका सेवन शीतकाल में, विशेष कर जनवरी से मार्च महिने के बीच ३० दिन तक, अलग एक कुटी बना कर रहते हुए करना चाहिए। इसकी पहली खुराक ५० ग्राम है जो गाय के दूध के साथ सुबह-शाम ली जाती है। धीरे-धीरे इस मात्रा को २०० ग्राम तक बढ़ा लेना चाहिए। यह प्रयोग उसी को करना चाहिए जिसका यकृत (Liver) बलवान हो, पाचन शक्ति अच्छी हो और जो ३० दिन तक एक कमरे में बना रह सके, पंच कर्म द्वारा शरीर की शुद्धि करवा चुका हो। समय व्यतीत करने के लिए पढ़ना-लिखना; टी.वी. देखना, ध्यान, पूजा-पाठ आदि काम किये जा सकते हैं।

आमलकी रसायन के फायदे : Amlaki Rasayan Benefits in Hindi

यह प्रयोग एक तरह से कल्प करना है जिससे बहुत कुछ मात्रा में ‘काया-कल्प’ हो सकता है। शास्त्रों में तो इतनी तारीफ़ लिखी है कि भरोसा करना मुश्किल है, पर हो भी सकता है कि पंचकर्म से शरीर शुद्धि करने के बाद, किसी योग्य अनुभवी आयुर्वेदाचार्य के निर्देशन में ३०-४० दिन तक, कठोर साधना करते हुए, अन्न जल का त्याग रख कर सिर्फ़ आमलकी रसायन की उचित मात्रा और गो दुग्ध का सेवन करते हुए निर्वाह कर सके तो वे सभी लाभ प्राप्त हो सकें जो शास्त्र में बताये गये हैं।

शास्त्र में इसकी प्रशंसा में जो कुछ कहा गया है उसका संक्षिप्त सार यह है कि बूढ़ा व्यक्ति भी फिर से युवा शरीर वाला हो जाता है नये दांत और बाल आ जाते हैं तथा शरीर में हाथी जैसा बल आ जाता है, धारणा शक्ति, बुद्धिबल और ओज की भारी वृद्धि होती है। अन्य लाभ इस प्रकार है –

आमलकी रसायन के लाभ – आँखों के लिए

आमलकी रसायन का उपयोग ज्यादातर आंखों के लिए किया जाता है, और यह लगभग सभी नेत्र रोगों को दूर करता है। यह आंखों के तनाव और आंखों की थकान से छुटकारा दिलाता है, मोतियाबिंद, धुंधली दृष्टि,आंखों की लालिमा और आंखों की जलन, कमजोर दृष्टि और अधिकांश अन्य नेत्र रोगों को दूर करता है।

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आमलकी रसायन के लाभ – शरीर का कायाकल्प करने के लिए

अध्ययनों से पता चला है कि आमलकी रसायन को गाय के घी और शहद के साथ दिन में 3 बार एक-डेढ़ महीने तक लेने से शरीर में कमजोरी, थकान और सिरदर्द में काफी राहत मिलती है।

यह हृदय, मस्तिष्क, पेट और अन्य शारीरिक अंगों को शक्ति देता है और वीर्य को गाढ़ा और मजबूत करता है और समय से पहले होने वाली पौरुष शक्ति की कमजोरी को ठीक करता है।

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आमलकी रसायन के फायदे – पाचन तंत्र के लिए

आमलकी रसायन पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है और भूख बढ़ाता है। इसका उपयोग जठरशोथ और अम्लपित्त के इलाज के लिए भी किया जाता है । यह लिवर को मजबूत बनाता है और आंतों की सूजन ठीक करने में उपयोगी है। अन्य संयोजनों के साथ, इसका उपयोग अल्सर और पेट दर्द को ठीक करने के लिए किया जा सकता है।

आमलकी रसायन के लाभ – बालों के झड़ने के लिए (amalaki rasayan for hair)

बालों के झड़ने की समस्या और बालों के समय से पहले सफेद होने से रोकने के लिए आमलकी रसायन का सेवन बहुत ही लाभदायक है ।

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आमलकी रसायन के लाभ – खून में हीमोग्लोबिन की कमी के लिए

आमलकी रसायन को हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता के लिए जाना जाता है।

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विशेष निवेदन- यह प्रयोग हम सिर्फ इस उद्देश्य से प्रस्तुत कर रहे हैं कि आयुर्वेद के इस अद्भुत योग की जानकारी पाठकों को दे सकें और यदि कोई व्यक्ति, किसी अनुभवी विद्वान आयुर्वेदाचार्य अथवा आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान की देख-रेख में, यह प्रयोग करना चाहे और विधिविधान के अनुसार सम्पन्न कर सके तो करके लाभ उठा सके। यह प्रयोग इसलिए प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति, अपनी मन मर्जी से, सिर्फ़ इस विवरण को पढ़ कर ही यह प्रयोग कर डाले। यह प्रयोग पं. मदन मोहनजी मालवीय द्वारा सेवन करने के पश्चात विशेष रूप से प्रकाश में आया है। वैसे उपाय सरल है और निरापद है बशर्ते पूरे विधि-विधान के साथ ही किया जाए। देश भर में ऐसे व्यक्ति भी हो सकते हैं और ऐसे आयुर्वेदाचार्य भी हो सकते हैं जो इस योग का प्रयोग कर लाभ उठा सकते हैं इसी भावना से हम यह लेख लिख रहे हैं।

अब इसी ‘आमलकी रसायन’ का दूसरा ऐसा प्रयोग भी प्रस्तुत कर रहे हैं जिसे कोई भी आसानी से सेवन कर लाभ उठा सकता है। यह योग बना हुआ बाज़ार में भी ‘आमलकी रसायन’ के नाम से मिलता है सो खरीद कर सेवन किया जा सकता है। इसे बनाने की खटपट करना भी ज़रूरी नहीं।

आमलकी रसायन बनाने की दूसरी विधि :

अच्छे, बड़े, बेदाग और पके हुए आंवले गरम उबलते हुए पानी में डाल कर ५ मिनिट तक रखें । नरम होने पर इनकी गुठली निकाल दें और आंवलों को धूप में खूब अच्छी तरह सुखा कर कूट पीस कर महीन चूर्ण कर लें। अब हरे आंवलों का रस निकाल कर, इस रस में यह चूर्ण डाल कर २१ दिन तक खरल में घुटाई करें। २२ वें दिन इसे किसी मर्तबान में भर कर रख लें। आंवले उबालने से लेकर खरल करने तक लोहे की करछुली, कड़ाही या किसी भी लोह-पात्र का प्रयोग या स्पर्श न करें वरना रसायन का रंग काला पड़ जाएगा। यही योग ‘आमलकी रसायन’ के नाम से विभिन्न आयुर्वेदिक निर्माताओं द्वारा निर्मित, बना-बनाया मिलता है। जो घर पर न बना सकें वे बाज़ार से खरीद सकते हैं।

मात्रा और सेवन विधि :

२ ग्राम मात्रा में प्रतिदिन सुबह खाली पेट शहद में मिला कर चाटें। दूध के साथ भी शहद मिला कर सेवन कर सकते हैं पर यह ख्याल रखें कि दूध बिल्कुल ठण्डा ही हो जाए क्योंकि शहद गरम दूध में सेवन नहीं किया जाता । कम से कम ६० दिन तक लगातार सेवन करें।

आमलकी रसायन से मिलने वाले लाभ :

☛ यह सरल और सस्ता योग होते हुए भी रसायन जैसे गुण और लाभ देने वाला है।
☛ युवा, छात्र-छात्रा, प्रौढ़, वृद्ध सब आयु वालों के लिए सभी ऋतुओं में सेवन योग्य है।
☛ यह वात, पित्त और कफ सभी प्रकृति वालों के लिए अनुकूल रहता है।
☛ शरीर में बल, स्फूर्ति और ओज की वृद्धि करता है ।
☛ सब धातुओं की शुद्धि एवं वृद्धि करता है ।
☛ स्मरण शक्ति, धारणाशक्ति और दिमागी शक्ति की वृद्धि करता है।
☛ इसे अधिक मात्रा में नहीं लेना चाहिए। रोगी व्यक्ति भी रोगशामक दवा लेते हुए इसका सेवन कर सकता है।

आमलकी रसायन के नुकसान : Amlaki Rasayan Side Effects in Hindi

इस दवा के कोई ज्ञात दुष्प्रभाव नहीं हैं फिर भी इसे आजमाने से पहले अपने चिकित्सक या सम्बंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ से राय अवश्य ले ।